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बिहार राजनीति: 10 सर्कुलर रोड से 39 हार्डिंग रोड जाएंगे लालू-राबड़ी?

Patna | बिहार की राजनीति में सरकारी आवास हमेशा सत्ता, हैसियत और संदेश का प्रतीक रहे हैं। अब एक बार फिर यही मुद्दा सुर्खियों में है। लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के जल्द खत्म होने के संकेत मिल रहे हैं। राजद सूत्रों के अनुसार परिवार 39 हार्डिंग रोड शिफ्ट हो सकता है और मकर संक्रांति के बाद इस पर औपचारिक निर्णय लिया जा सकता है।

राजद के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जैसे ही 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी बंगला औपचारिक रूप से सुपुर्द किया जाएगा, लालू-राबड़ी परिवार वहां शिफ्ट होने का फैसला ले सकता है। महुआ बाग स्थित नए बंगले में फिलहाल जाने की संभावना कम बताई जा रही है, क्योंकि वहां निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है।

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10 सर्कुलर रोड को लेकर चल रही रार अब अपने अंतिम चरण में दिख रही है। पार्टी के भीतर यह स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि मामला राजनीति का नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राजद नेतृत्व इस मुद्दे को लंबा खींचने के मूड में नहीं दिख रहा।

नोटिस से शुरू हुई प्रक्रिया

बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 25 नवंबर 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राबड़ी देवी को केंद्रीय पूल से नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है।

प्रशासनिक आदेश के बाद से ही बंगला खाली कराने की प्रक्रिया तेज हो गई थी। इसी कड़ी में गुरुवार देर रात बंगले से पेड़-पौधों, गमलों और घरेलू सामान को पिकअप वैन के जरिये बाहर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया।

39 हार्डिंग रोड की ओर कदम

राजद सूत्रों के अनुसार 39 हार्डिंग रोड को लेकर तकनीकी और औपचारिक प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। सरकार की ओर से जैसे ही बंगला आधिकारिक रूप से हैंडओवर होगा, शिफ्टिंग की तारीख तय की जा सकती है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह बदलाव किसी दबाव या सियासी मजबूरी का नतीजा नहीं है, बल्कि नियमों के तहत हो रही सामान्य प्रक्रिया है। इसी कारण राजद नेतृत्व सार्वजनिक बयानबाजी से भी दूरी बनाए हुए है।

कृष्ण गौशाला में पहुंचा सामान

10 सर्कुलर रोड स्थित आवास से हटाए जा रहे फूलों के गमले और गार्डन से जुड़ा सामान दानापुर के नया टोला स्थित कृष्ण गौशाला में रखा जा रहा है। देर रात छोटे वाहनों के माध्यम से यह सामान वहां पहुंचाया गया।

इस घटनाक्रम को प्रशासनिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। इससे यह संकेत और मजबूत हुआ है कि बंगला खाली करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

प्रशासन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद पुराने सरकारी आवास को खाली न करना सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है। उनके अनुसार यह राजनीति नहीं, बल्कि कानून और नियमों के पालन का सवाल है।

वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने इस पर पलटवार किया है। राजद के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि 10 सर्कुलर रोड खाली करना कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ता पक्ष उन नेताओं पर क्यों चुप्पी साधे हुए है, जो अब भी नियमों के बावजूद सरकारी आवासों पर काबिज हैं।

जनता और सियासी असर

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बिहार की राजनीति में सरकारी आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सत्ता के संकेतक भी माने जाते हैं। ऐसे में 10 सर्कुलर रोड की विदाई और 39 हार्डिंग रोड में संभावित एंट्री को आने वाले दिनों में सियासी संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है।

हालांकि आम जनता के बीच यह मुद्दा फिलहाल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नजर आ रहा है। अधिकांश लोगों की नजर इस बात पर है कि नियमों का पालन किस तरह और कितनी पारदर्शिता से होता है।

मकर संक्रांति के बाद 39 हार्डिंग रोड को लेकर औपचारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 10 सर्कुलर रोड को पूरी तरह खाली करने की प्रक्रिया भी पूरी हो सकती है।

आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह बदलाव बिहार की राजनीति में केवल एक प्रशासनिक कदम बनकर रह जाता है या फिर किसी बड़े सियासी संकेत का रूप लेता है।

10 सर्कुलर रोड से 39 हार्डिंग रोड की संभावित शिफ्टिंग ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में सरकारी आवासों की अहमियत को उजागर किया है। फिलहाल संकेत यही हैं कि मामला सियासी टकराव से ज्यादा नियम और प्रक्रिया के दायरे में सुलझने की ओर बढ़ रहा है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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