लालू प्रसाद यादव: बिहार की राजनीति का अनोखा चेहरा

Subhash Shekhar
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लालू प्रसाद यादव भारत के सबसे चर्चित राजनेताओं में से एक हैं। वे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से शुरू हुआ और वे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे। लालू यादव का नाम भारतीय राजनीति में मंडल राजनीति और सामाजिक न्याय के लिए जाना जाता है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

लालू प्रसाद यादव का जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था। वे एक साधारण यादव परिवार से आते हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में हुई और बाद में उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। राजनीति में उनकी रुचि छात्र जीवन से ही थी और वे पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (PUSU) के महासचिव भी रहे।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

लालू यादव ने 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भाग लिया। इस आंदोलन ने उन्हें बिहार में एक युवा नेता के रूप में स्थापित किया। 1977 में आपातकाल के बाद हुए चुनावों में वे जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गए और महज 29 साल की उम्र में संसद पहुंचे। इसके बाद वे लगातार बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे और 1980 एवं 1985 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

मुख्यमंत्री बनने का सफर

1989 में विपक्ष के नेता बने लालू यादव ने 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उनके शासनकाल में पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समुदाय के समर्थन के कारण उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई।

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मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की मुख्य विशेषताएं:

  • मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करना
  • सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना
  • राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी
  • ग्रामीण विकास और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करना

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की स्थापना

1997 में जनता दल से अलग होकर लालू यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की स्थापना की। इसी वर्ष उन्हें चारा घोटाले के आरोपों में घिरने के कारण मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा और उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की स्थापना

रेल मंत्री के रूप में कार्यकाल

2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में रेल मंत्री बनने के बाद उन्होंने भारतीय रेलवे को मुनाफे में लाने का दावा किया। उनके कार्यकाल में रेलवे के वित्तीय मॉडल को IIM और हार्वर्ड जैसे संस्थानों में अध्ययन का विषय बनाया गया।

चारा घोटाला और कानूनी विवाद

चारा घोटाले में 2013 में उन्हें 5 साल की सजा और 25 लाख रुपये का जुर्माना हुआ। इस कारण वे लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य हो गए और उन्हें रांची की बिरसा मुंडा जेल में रखा गया। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली।

चारा घोटाला और कानूनी विवाद

पारिवारिक जीवन

लालू यादव की शादी राबड़ी देवी से हुई और उनके 9 बच्चे हैं। उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं।

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वर्तमान राजनीतिक स्थिति

लालू यादव अभी भी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख नेता हैं और बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव बना हुआ है। वे 2024 के लोकसभा चुनावों में फिर से सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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