रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 को लेकर चल रहा भाषा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ताज़ा अपडेट के अनुसार, इस बार की परीक्षा में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को शामिल नहीं किया जाएगा। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा विज्ञापन जारी होने और आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब नियमों में बदलाव करना कानूनी तौर पर नामुमकिन माना जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी समीक्षा तो करेगी, लेकिन उसका असर इस साल की परीक्षा पर नहीं पड़ेगा।
झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस खबर ने राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना के आधार पर ही इस बार की परीक्षा आयोजित की जा रही है, जिसमें इन तीन प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को स्थान नहीं मिला है।
आखिर क्यों अटकी भोजपुरी, मगही और अंगिका?
सरकार के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर भारी विरोध देखने को मिल रहा है। कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह ने जेटेट नियमावली में इन भाषाओं को शामिल न किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, तकनीकी पेंच यह है कि यदि विज्ञापन जारी होने के बाद पात्रता शर्तों या सिलेबस में कोई बड़ा बदलाव किया जाता है, तो पूरी चयन प्रक्रिया अदालत (Court) में फंस सकती है। इससे परीक्षा रद्द होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसे सरकार किसी भी कीमत पर मोल नहीं लेना चाहती।
पांच मंत्रियों की कमेटी करेगी समीक्षा, लेकिन…
भाषा विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने पांच मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। इस कमेटी में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर (संयोजक), मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, योगेंद्र प्रसाद और सुदिव्य कुमार शामिल हैं।
- कमेटी का काम: विभिन्न जिलों में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की जनसांख्यिकी का अध्ययन करना और भाषाओं को जोड़ने या हटाने की सिफारिश करना।
- पहली बैठक: इस कमेटी की पहली बैठक 17 मई को प्रस्तावित है।
- असर: कमेटी की रिपोर्ट और कैबिनेट की मंजूरी में लंबा समय लग सकता है, इसलिए इसका लाभ अगली जेटेट परीक्षा से ही मिल पाएगा।
जैक (JAC) के लिए क्यों मुश्किल है तत्काल बदलाव?
झारखंड एकेडमिक काउंसिल के ऑनलाइन पोर्टल पर भाषाओं का विकल्प पहले से ही तय किया जा चुका है। 21 मई आवेदन की अंतिम तिथि है। अगर अब नई भाषाएं जोड़ी जाती हैं, तो पूरे डिजिटल डेटाबेस और पोर्टल के डिजाइन को दोबारा तैयार करना होगा, जो मौजूदा समय सीमा के भीतर संभव नहीं है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि वे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहते और परीक्षा को समय पर पूरा करना प्राथमिकता है।
पलामू और संथाल परगना के छात्रों पर सीधा असर
इस फैसले का सबसे बड़ा असर पलामू प्रमंडल और संथाल परगना के छात्रों पर पड़ेगा। पलामू में भोजपुरी और मगही, जबकि गोड्डा समेत संथाल परगना के कई जिलों में अंगिका बड़े पैमाने पर बोली जाती है। इन क्षेत्रों के अभ्यर्थी लंबे समय से इन भाषाओं को शामिल करने की मांग कर रहे थे। अब उन्हें उपलब्ध अधिसूचित क्षेत्रीय भाषाओं में से ही किसी एक को चुनना होगा।
फिलहाल, JTET 2026 की परीक्षा अपने निर्धारित शेड्यूल और पुरानी भाषा सूची के साथ ही आगे बढ़ेगी। छात्रों के पास 21 मई तक आवेदन करने का मौका है। अब सबकी नजरें 17 मई को होने वाली मंत्रियों की बैठक पर टिकी हैं, जहां भविष्य की परीक्षाओं के लिए भाषा नीति का नया खाका तैयार किया जा सकता है।
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