Ranchi | झारखंड की राजनीति में इस वक्त जुबानी जंग अपने चरम पर है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कद्दावर नेता और केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। पांडेय ने दावा किया है कि मरांडी जिस “जी-तोड़ मेहनत” में जुटे हैं, उसका नतीजा भाजपा के लिए ‘मिशन-11’ साबित होगा यानी पार्टी दहाई के आंकड़े पर सिमट जाएगी। इस बयान ने राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा विवाद? प्रशासन की कार्रवाई पर मरांडी की घेराबंदी
दरअसल, हाल ही में झारखंड सरकार ने एक पुलिस अधिकारी द्वारा अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें पदमुक्त कर दिया था। जेएमएम का कहना है कि यह सरकार की संवेदनशीलता है, लेकिन विनोद पांडेय के अनुसार, बाबूलाल मरांडी को इस प्रशासनिक सुधार से भी दिक्कत है। पांडेय ने तंज कसते हुए कहा, “मरांडी जी हर उस चीज का विरोध कर रहे हैं जो नियमसंगत है, जिससे साफ है कि वे मर्यादा और सम्मान दोनों खोते जा रहे हैं।”
राजभवन में ‘चाय और डोमिसाइल’ के किस्से: JMM का कटाक्ष
जेएमएम महासचिव ने बाबूलाल मरांडी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘राजभवन का स्थायी मेहमान’ करार दिया। पांडेय ने कहा:
“मरांडी जी रोज़ गवर्नर हाउस का चक्कर लगाते हैं, वहां चाय पीते हैं और 2003 के अपने पुराने डोमिसाइल वाले किस्से सुनाकर लोगों को बोर करते हैं। दिल्ली का केंद्रीय नेतृत्व भी अब उनसे दूरी बनाने लगा है, इसलिए वे राज्य में अपनी प्रासंगिकता बचाने के लिए बेकार के मुद्दे उठा रहे हैं।”
भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष? ‘100 नारियल’ का दावा
इस ग्राउंड रिपोर्ट नुमा बयान में सबसे चौंकाने वाला दावा भाजपा कार्यकर्ताओं को लेकर किया गया है। विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा के आम कार्यकर्ता खुद मरांडी के नेतृत्व से त्रस्त हो चुके हैं। कार्यकर्ताओं के बीच मजाक चल रहा है कि जिस दिन बाबूलाल मरांडी पार्टी का पीछा छोड़ेंगे, उस दिन खुशी में 100-100 नारियल फोड़े जाएंगे।
आंकड़ों की बाजीगरी: 24 से 21 और अब ‘शगुन के 11’
विनोद पांडेय ने भाजपा की चुनावी गिरावट का दोष सीधे मरांडी के सिर मढ़ा है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए समझाया कि:
- 2019 विधानसभा: भाजपा को 24 सीटें मिली थीं।
- 2024 विधानसभा: मरांडी के चेहरे पर चुनाव लड़ने के बाद यह संख्या घटकर 21 रह गई।
- उपचुनाव का रिकॉर्ड: पिछले 5 वर्षों में बाबूलाल मरांडी भाजपा को एक भी उपचुनाव नहीं जिता पाए।
पांडेय ने कटाक्ष किया कि मरांडी का लक्ष्य अब 2029 तक भाजपा को ‘शगुन की 11 सीटों’ तक समेटना है। उन्होंने तंज कसा कि अगर यही हाल रहा तो अगली बार भाजपा के लिए 5 सीटें जीतना भी पहाड़ जैसा होगा।
क्या प्रधानमंत्री बनने की है महत्वाकांक्षा?
जेएमएम ने आरोप लगाया कि एक तरफ मरांडी छोटे अधिकारियों को “एक्सपोज़” करने की धमकियां देते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी महत्वाकांक्षा सीधे प्रधानमंत्री बनने की है। पांडेय ने अंत में चुनौती देते हुए कहा कि मरांडी को अधिकारियों को डराना छोड़कर सबसे पहले अपना ‘निजी एजेंडा’ जनता के सामने एक्सपोज़ करना चाहिए।
आगे क्या होगा? बाबूलाल मरांडी पर इस चौतरफा हमले के बाद अब सबकी नजरें भाजपा के पलटवार पर टिकी हैं। क्या भाजपा अपने प्रदेश अध्यक्ष के बचाव में आएगी या जेएमएम के दावों के बीच पार्टी के अंदरूनी कलह की खबरें और तेज होंगी?








