Ranchi | झारखंड के लाखों युवाओं के सपनों पर एक बार फिर ‘पेपर लीक’ का काला साया मंडरा रहा है। 12 अप्रैल को हुई उत्पाद सिपाही परीक्षा में हुई भारी गड़बड़ी और तमाड़ में 150 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब यह मामला सीधे राजभवन पहुंच गया है। मंगलवार को भाजपा के दिग्गज नेताओं ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और JPSC के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए।
राज्य में माहौल तब गर्मा गया जब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सात सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। भाजपा का सीधा आरोप है कि हेमंत सरकार में नौकरियां नहीं दी जा रही हैं, बल्कि युवाओं का भविष्य 15-15 लाख रुपये में खुलेआम नीलाम किया जा रहा है।
तमाड़ का वो ‘निर्माणाधीन भवन’ और 150 गिरफ्तारियां: आखिर क्या है पूरा सच?
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, तमाड़ में एक निर्माणाधीन भवन को परीक्षा माफियाओं ने अपना कंट्रोल रूम बनाया था। पुलिसिया कार्रवाई में वहां से कंप्यूटर, प्रिंटर, लैपटॉप और संदिग्ध प्रश्नपत्रों के साथ कई गाड़ियां बरामद हुई हैं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि माफियाओं ने अभ्यर्थियों के मोबाइल और एडमिट कार्ड तक जब्त कर लिए थे ताकि कोई सबूत बाहर न जा सके।
खबर के मुख्य बिंदु:
- सौदा: प्रत्येक अभ्यर्थी से 15-15 लाख रुपये में सेटिंग की बात सामने आई है।
- गिरफ्तारी: एक ही स्थान से 150 से अधिक लोगों का पकड़ा जाना बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है।
- आयोग का रुख: इतनी बरामदगी के बावजूद JSSC पेपर लीक से इनकार कर रहा है, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश है।
“दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है” – भाजपा का तीखा प्रहार
राजभवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में पेपर लीक की एक लंबी फेहरिस्त बन चुकी है। मैट्रिक से लेकर JSSC-CGL तक, हर परीक्षा विवादों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई ईमानदार अधिकारी जांच करता है, तो सरकार जांच टीम ही बदल देती है।
“जब एक सेंटर पर 150 गिरफ्तारियां हुई हैं, तो बाकी 369 केंद्रों का क्या हाल होगा? यह गिरोह सरकार और प्रशासन के संरक्षण के बिना फल-फूल नहीं सकता।” – बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष
JSSC और JPSC की साख पर उठे 7 बड़े सवाल
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के सामने जो मांगें रखी हैं, वे राज्य की पूरी चयन प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करती हैं:
- CBI जांच की अनिवार्यता: राज्य की पुलिस और एजेंसियों पर भरोसा नहीं, इसलिए केंद्रीय जांच की मांग।
- माफिया-आयोग सांठगांठ: पेपर माफिया और आयोग के अधिकारियों के बीच के ‘कनेक्शन’ की परतें खुलें।
- 6 साल का हिसाब: पिछले 6 वर्षों में JSSC और JPSC द्वारा ली गई सभी परीक्षाओं की दोबारा जांच हो।
- दोषियों पर डंडा: सॉल्वर गैंग के अंतर्राज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए।
आम छात्र पर असर: मेहनत या पैसा?
झारखंड के 8 जिलों में 583 पदों के लिए करीब 1.48 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से अधिकतर वे छात्र हैं जो वर्षों से लाइब्रेरी और छोटे कमरों में रहकर तैयारी कर रहे हैं। तमाड़ कांड के बाद अब इन छात्रों को डर है कि कहीं उनकी मेहनत पर ‘करोड़पति माफिया’ भारी न पड़ जाएं। यदि यह परीक्षा रद्द होती है या जांच में देरी होती है, तो ओवरएज हो रहे युवाओं के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।
आगे क्या? राजभवन के फैसले पर टिकी नजरें
राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना है। अब देखना यह है कि क्या राजभवन इस मामले में हस्तक्षेप कर राज्य सरकार को CBI जांच की सिफारिश करने का निर्देश देता है या एक बार फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। झारखंड के युवाओं ने सोशल मीडिया पर ‘Justice for Jharkhand Students’ मुहीम शुरू कर दी है, जो आने वाले दिनों में एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।








