PESA नियमावली विवाद: JMM का अर्जुन मुंडा पर पलटवार, विनोद पांडेय बोले- ‘ग्राम सभा सर्वोच्च है और रहेगी’

PESA नियमावली विवाद: JMM का अर्जुन मुंडा पर पलटवार, विनोद पांडेय बोले- 'ग्राम सभा सर्वोच्च है और रहेगी'

Ranchi | झारखंड में पेसा नियमावली (PESA Rules) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा उठाए गए सवालों पर अब सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आक्रामक रुख अपना लिया है।

जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने शनिवार (4 जनवरी) को एक बयान जारी कर भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हेमंत सोरेन सरकार द्वारा लागू की गई नियमावली में ग्राम सभा ही सर्वोच्च है और भविष्य में भी रहेगी।

भाजपा के आरोप हताशा का परिणाम: विनोद पांडेय

विनोद पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के बयानों को “राजनीतिक हताशा” और “भ्रामक” करार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को आज अचानक आदिवासियों के हितों की चिंता सताने लगी है, जबकि सच्चाई यह है कि राज्य में लंबे समय तक शासन करने के बावजूद भाजपा ने पेसा कानून को धरातल पर उतारने की कभी नियत नहीं दिखाई।

पांडेय ने कहा, “हेमंत सरकार ने वह काम करके दिखाया है जो पिछले कई दशकों में नहीं हो सका। हमने संवैधानिक दायरे में रहते हुए आदिवासियों को उनके अधिकार सौंपे हैं, जो भाजपा को हजम नहीं हो रहा है।”

अर्जुन मुंडा के कार्यकाल पर उठाए सवाल

जेएमएम महासचिव ने सीधे तौर पर अर्जुन मुंडा को घेरते हुए कहा कि वे स्वयं लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे। जनता यह सवाल पूछ रही है कि उस दौरान पेसा कानून के नियम क्यों नहीं बनाए गए? उस समय ग्राम सभाओं को अधिकार संपन्न क्यों नहीं बनाया गया?

जेएमएम का आरोप है कि भाजपा ने आदिवासियों का इस्तेमाल केवल ‘वोट बैंक’ के रूप में किया है, जबकि वर्तमान सरकार उन्हें वास्तविक शक्ति देने का काम कर रही है।

‘कोल्ड ब्लडेड मर्डर’ वाले बयान पर तीखा हमला

सूत्रों के अनुसार, विपक्ष द्वारा नियमावली को “कोल्ड ब्लडेड मर्डर” (अधिकारों की हत्या) कहे जाने पर विनोद पांडेय ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे भाजपा की “संवैधानिक अज्ञानता” बताया।

पांडेय ने कहा, “जो लोग वर्षों तक आदिवासी अधिकारों का हनन करते रहे, उन्हें आज ऐसे भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यह बयानबाजी केवल उनकी राजनीतिक कुंठा को दर्शाती है।”

ग्राम सभा के अधिकारों पर क्या है सच्चाई?

पेसा नियमावली को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करते हुए विनोद पांडेय ने तकनीकी पक्ष भी रखा। उन्होंने बताया कि:

  1. नई नियमावली में ग्राम सभा की भूमिका को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत किया गया है।
  2. आदिवासी परंपरा, रूढ़ि और स्थानीय स्वशासन की भावनाओं को संविधान के अनुरूप व्यावहारिक रूप दिया गया है।
  3. सरकार का उद्देश्य आदिवासी अस्मिता और स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण देना है।

झारखंड की राजनीति पर इसका असर

झारखंड की राजनीति में आदिवासी अस्मिता और पेसा कानून हमेशा से ही केंद्र बिंदु रहे हैं। विधानसभा चुनावों के बाद और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले इस मुद्दे का गर्माना महत्वपूर्ण है।

जानकारों का मानना है कि जेएमएम इस मुद्दे पर रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक होकर यह संदेश देना चाहती है कि वह आदिवासी हितों की एकमात्र हितैषी है। वहीं, भाजपा इस मुद्दे के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, लेकिन जेएमएम ने ‘रिकॉर्ड’ की बात करके गेंद वापस भाजपा के पाले में डाल दी है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ कर दिया है कि वह पेसा नियमावली पर किसी भी रचनात्मक सुझाव (Constructive Suggestion) का स्वागत करने के लिए तैयार है। लेकिन, अगर राजनीतिक दुर्भावना से जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई, तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि अर्जुन मुंडा या भाजपा की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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