Ranchi | झारखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सोरेन सरकार और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर सीधा हमला बोला है। शाहदेव ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को ‘वेंटिलेटर’ पर बताते हुए आरोप लगाया कि जब सूबे के 14 जिलों में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे खून की एक-एक बूंद के लिए तड़प रहे हैं, तब स्वास्थ्य मंत्री रिक्शा चलाकर फोटो खिंचवाने में मशगूल हैं।
मौत के मुहाने पर खड़े मासूम: 14 जिलों में हाहाकार
झारखंड के स्वास्थ्य महकमे से जो खबरें निकलकर आ रही हैं, वे विचलित करने वाली हैं। प्रतुल शाहदेव ने ग्राउंड रियलिटी बताते हुए कहा कि राज्य के 14 जिलों में थैलेसीमिया से पीड़ित सैकड़ों बच्चों की जान जोखिम में है। ब्लड बैंकों में खून नहीं है और डोनर्स की कमी के बीच सरकारी तंत्र पूरी तरह पंगु हो चुका है। सबसे शर्मनाक वाकया तब सामने आया जब जांच के बिना ही बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
आंकड़ों में बदहाली: 60% विशेषज्ञों के पद खाली
बीजेपी प्रवक्ता ने सरकारी दावों की पोल खोलते हुए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:
- डॉक्टरों की कमी: स्वीकृत पदों के मुकाबले हजारों पद खाली पड़े हैं।
- विशेषज्ञों का संकट: राज्य में 60% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, जिससे गंभीर मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा।
- नर्सिंग स्टाफ: बड़े सरकारी अस्पतालों में 70% से 80% तक नर्सों की कमी है।
- पैरामेडिकल: लगभग 3000 पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति प्रक्रिया अटकी हुई है।
- दवाइयों का टोटा: कई हेल्थ सेंटर्स की हालत यह है कि वहां पैरासिटामोल जैसी बेसिक गोलियां भी उपलब्ध नहीं हैं।
“मंत्री जी, फोटोबाजी छोड़िए… काम कीजिए”
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर कटाक्ष करते हुए शाहदेव ने पूछा, “जब राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था आईसीयू में है, तब मंत्री जी रिक्शा चलाकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। जनता जानना चाहती है कि क्या अब रिक्शा से ही सरकारी अस्पतालों में ब्लड पहुंचाया जाएगा?” उन्होंने तंज कसा कि दिखावे की राजनीति से मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकती।
दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
शाहदेव ने एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब तक दोषी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को नौकरी से बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? यह सिस्टम की विफलता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत डॉक्टरों और नर्सों की बहाली करे, ब्लड बैंक सिस्टम को दुरुस्त करे और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए ‘इमरजेंसी एक्शन प्लान’ लागू करे।
ग्राउंड रिपोर्ट का निष्कर्ष: झारखंड के दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य केंद्र केवल ‘भवन’ बनकर रह गए हैं। अगर समय रहते नियुक्तियां नहीं हुईं और ब्लड बैंकों की हालत नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा सकता है।










