Ranchi | रांची की बुटी बस्ती में आज उस वक्त हलचल बढ़ गई, जब जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की टीम सीधे जनता के बीच पहुंची। मौका था 90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता कार्यक्रम का, जिसके तहत न्याय की किरण को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
अक्सर कानूनी दांव-पेंच और अधिकारों की जानकारी न होने से गरीब और पिछड़े वर्ग के लोग अदालतों के चक्कर काटते रह जाते हैं। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए डालसा सचिव श्री राकेश रौशन की मौजूदगी में इस महा-अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका सीधा असर रांची के सैकड़ों परिवारों पर पड़ने वाला है।
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर शुरू हुआ यह अभियान सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि पूरी तरह ग्राउंड-कनेक्टेड है। इसमें जेल में बंद विचाराधीन कैदियों और उनके लाचार परिवारों को विधिक सहायता और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने पर फोकस किया जा रहा है।
’प्रोजेक्ट कर्तव्य’ से कैदियों के परिवारों को मिलेगा नया जीवन
बूटी मोड़ स्थित बुटी बस्ती के सामुदायिक केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में जमीन से जुड़े पैरा लीगल वॉलिंटियर्स (PLV) ने मोर्चा संभाला। मैदान में मौजूद ग्रामीणों को संबोधित करते हुए पीएलवी अमित बड़ाईक ने एक बेहद भावुक और महत्वपूर्ण बात कही।
”झालसा द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट कर्तव्य’ जेल में बंद कैदियों और उनके बेकसूर परिवार के सदस्यों के कल्याण के लिए शुरू किया गया एक अत्यंत मानवीय कदम है। कई बार घर का मुख्य कमाने वाला जेल चला जाता है, जिससे उसका पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो जाता है। यह प्रोजेक्ट उन्हीं सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर विचाराधीन कैदियों, दोषियों और उनके आश्रितों को कानूनी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाएगा।”

मईंया सम्मान और पेंशन योजनाओं की ग्राउंड रिपोर्ट
ग्राउंड पर मौजूद पीएलवी स्नेहलता दुबे ने महिलाओं और ग्रामीणों को राज्य व केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और झारखंड सरकार की लोकप्रिय ‘मईंया सम्मान योजना’ का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक आम महिला सीधे अपने बैंक खाते में वित्तीय सहायता पा सकती है।
वहीं, पीएलवी बेबी सिन्हा ने सीधे उन मुद्दों पर बात की जो ग्रामीण इलाकों में अभिशाप बने हुए हैं। उन्होंने बाल विवाह, बाल श्रम और ‘डायन बिसाही’ जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ कड़े कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि अगर कोई इन कुप्रथाओं का शिकार होता है, तो डालसा उसे न्याय और ‘पीड़ित मुआवजा’ दोनों दिलाएगा।
15100: एक टोल-फ्री नंबर जो दिलाएगा हर कानूनी उलझन से मुक्ति
कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा नालसा (NALSA) के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर हुई। ग्रामीणों को बताया गया कि अगर उनके पास वकील की फीस देने के पैसे नहीं हैं, या कोई कानूनी संकट है, तो वे इस नंबर पर मुफ्त में कॉल कर विधिक सहायता और मुफ्त वकील की मांग कर सकते हैं।
जागरूकता सत्र के बाद पूरी टीम ने बस्ती के घर-घर जाकर विधिक जानकारी से संबंधित पम्पलेट्स और लीफलेट्स बांटे, ताकि कम पढ़े-लिखे लोग भी अपने अधिकारों को आसानी से समझ सकें।
सिस्टम का अगला कदम: क्या है डालसा का मास्टरप्लान?
What Next: डालसा सचिव श्री राकेश रौशन के मुताबिक, यह 90 दिवसीय विधिक जागरूकता कार्यक्रम रांची के हर सुदूर ब्लॉक और पंचायत तक पहुंचेगा। प्रशासन का अगला कदम इन शिविरों के माध्यम से उन कैदियों के परिवारों की पहचान करना है, जिन्हें तुरंत राशन, शिक्षा या पेंशन की जरूरत है। आने वाले दिनों में जेलों के अंदर भी विशेष कैंप लगाकर विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा की जाएगी, ताकि छोटे अपराधों में बंद गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता देकर जल्द बेल दिलाई जा सके।











