मैट्रिक-इंटर के बाद क्या? झारखंड सरकार की इन 5 योजनाओं ने छात्रों की खोल दी किस्मत, अब पैसे की कमी नहीं रोकेगी पढ़ाई!

Subhash Shekhar
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Ranchi | झारखंड में मैट्रिक और इंटर की परीक्षाएं समाप्त होते ही अब लाखों छात्र और उनके अभिभावक इस चिंता में हैं कि आगे की पढ़ाई का भारी-भरकम खर्च कैसे मैनेज होगा। लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा विभाग ने 2026 के शैक्षणिक सत्र के लिए ऐसी ‘ब्रह्मास्त्र’ योजनाएं जमीन पर उतारी हैं, जो गरीब से गरीब मेधावी छात्र को भी विदेशों के बड़े विश्वविद्यालयों तक पहुँचाने की ताकत रखती हैं। चाहे आपको डॉक्टर बनना हो, इंजीनियर या फिर विदेश से रिसर्च करनी हो—हेमंत सोरेन सरकार की ये योजनाएं अब आपकी जेब नहीं, बल्कि आपकी योग्यता देखेंगी।

1. गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: बिना गारंटी ₹15 लाख का लोन, ब्याज सिर्फ नाममात्र

झारखंड सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि इस योजना के तहत छात्रों को ₹15 लाख तक का ऋण मिलता है, जिसके लिए बैंक को कोई जमीन या गहने गिरवी रखने की जरूरत नहीं है।

  • असर: मात्र 4% साधारण ब्याज और पढ़ाई खत्म होने के बाद 15 साल की लंबी किश्तें। यह योजना उन मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए संजीवनी है जो बैंक लोन की कागजी कार्रवाई से डरते थे।

2. ई-कल्याण: इस बार स्कॉलरशिप की राशि में बड़ा बदलाव?

झारखंड के SC, ST और OBC छात्रों के लिए ई-कल्याण पोर्टल अब पहले से अधिक सक्रिय हो गया है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की प्रक्रिया को और तेज़ किया जाएगा ताकि सत्र शुरू होते ही छात्रों के बैंक खातों में राशि पहुँच जाए।

  • ग्राउंड रिपोर्ट: ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार आय प्रमाण पत्र और बोनाफाइड सर्टिफिकेट बनवाने के लिए प्रज्ञा केंद्रों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। ₹2.50 लाख से कम आय वाले परिवारों के लिए यह उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा आधार है।

3. मारंग गोमके ओवरसीज स्कॉलरशिप: झारखंड के लाल अब सात समंदर पार

क्या आपने कभी सोचा था कि झारखंड का एक आदिवासी या पिछड़ा वर्ग का छात्र ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज में पढ़ेगा और सारा खर्च सरकार उठाएगी? मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा विदेशी छात्रवृत्ति योजना ने इसे हकीकत बना दिया है।

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  • नया अपडेट: 2026 में लाभार्थियों का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब 50 छात्र-छात्राओं को हर साल यूके और आयरलैंड जैसे देशों में पढ़ाई के लिए भेजा जा रहा है। ट्यूशन फीस से लेकर हवाई टिकट तक, सबकुछ सरकारी खजाने से दिया जा रहा है।

4. मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति (CMMSS): प्रतिभा का सम्मान

जो छात्र प्रतियोगिता में विश्वास रखते हैं, उनके लिए CMMSS एक बड़ा मंच है। राज्य स्तरीय चयन परीक्षा के माध्यम से चुने गए छात्रों को सालाना ₹12,000 की प्रोत्साहन राशि मिलती है। यह राशि सीधे तौर पर उनकी कोचिंग और किताबों के खर्च को कवर करती है।

5. श्रम विभाग की खास योजना: मजदूरों के बच्चे भी बनेंगे अफसर

अगर आपके माता-पिता श्रम विभाग में निबंधित श्रमिक हैं, तो आपके लिए मेधावी पुत्र-पुत्री योजना के द्वार खुले हैं। इसमें प्रोफेशनल कोर्स (ITI, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग) के लिए ₹50,000 तक की एकमुश्त सहायता दी जाती है, जो कि किसी भी प्राइवेट स्कॉलरशिप से कहीं अधिक है।

दरअसल, झारखंड में इस समय ‘करियर स्विच’ का दौर है। परंपरागत बीए और बीएससी के बजाय छात्र अब वोकेशनल और प्रोफेशनल कोर्स की ओर भाग रहे हैं।

आगे क्या? प्रशासन की तैयारी

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, जून के पहले सप्ताह से सभी कॉलेजों में विशेष ‘हेल्प डेस्क’ स्थापित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि नामांकन के साथ ही छात्र का स्कॉलरशिप फॉर्म भी भरवा लिया जाए ताकि बीच में पढ़ाई छूटने (Drop-out) का खतरा न रहे।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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