झारखंड OBC स्कॉलरशिप: केंद्र ने नहीं दिया पैसा, तो मंत्री ने बदल दिए नियम; अब ऐसे मिलेंगे ₹400 करोड़!

Subhash Shekhar
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रांची: झारखंड के पिछड़ा वर्ग (OBC) के लाखों छात्र-छात्राओं के लिए होली से पहले दिवाली जैसा तोहफा सामने आया है। राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने एक ऐसा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है, जिसने दिल्ली से लेकर रांची तक की सियासत और छात्र राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने नियमों में बड़े बदलाव को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद अब छात्रों को अपनी स्कॉलरशिप के लिए केंद्र सरकार के फंड का इंतजार नहीं करना होगा।

क्यों फंसी थी स्कॉलरशिप? जानिए क्या था ‘फंड का पेंच’

दरअसल, स्कॉलरशिप का गणित 60:40 के अनुपात पर टिका होता है। यानी 60% पैसा केंद्र सरकार देती है और 40% राज्य सरकार। नियम यह था कि जब तक दोनों ओर से राशि रिलीज नहीं होती, छात्रों को पैसा नहीं मिलता। केंद्र सरकार से पिछले दो सालों (2023-24 और 2024-25) का लगभग 850 करोड़ रुपये का बकाया अभी तक नहीं मिला है। इस ‘फंड की लड़ाई’ में पिस रहे थे सूबे के 5.5 लाख होनहार छात्र।

मंत्री चमरा लिंडा का कड़ा फैसला: अब राज्य अपने दम पर बांटेगा पैसा

छात्रों के बढ़ते आक्रोश और पढ़ाई के नुकसान को देखते हुए कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने प्रावधान शिथिल (नियमों में ढील) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

“हमने तय किया है कि हम केंद्र की राशि का और इंतजार नहीं करेंगे। राज्य सरकार अपने हिस्से के 400 करोड़ रुपये सीधे छात्रों के खातों में भेजेगी। इसके लिए वित्त विभाग को फाइल भेज दी गई है।” — चमरा लिंडा, कल्याण मंत्री, झारखंड

किसे कितना मिलेगा? आंकड़ों की जुबानी पूरी कहानी

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा कक्षा 9वीं से लेकर पोस्ट मैट्रिक (कॉलेज) तक के छात्रों को होगा।

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  • 9वीं और 10वीं के छात्र: इनके लिए ₹100 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है।
  • पोस्ट मैट्रिक छात्र: कॉलेज और उच्च शिक्षा ले रहे छात्रों के लिए ₹300 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • कुल लाभार्थी: लगभग 5.5 लाख OBC छात्र।

ग्राउंड रिपोर्ट: 31 मार्च तक का है ‘डेडलाइन’ मिशन

विभागीय सूत्रों की मानें तो कल्याण विभाग 31 मार्च 2026 तक हर हाल में यह राशि छात्रों के बैंक खातों (DBT) के जरिए पहुंचाने की तैयारी में है। अगर वित्त विभाग से अगले एक हफ्ते में फाइल क्लियर हो जाती है, तो मार्च के दूसरे पखवाड़े में छात्रों के मोबाइल पर ‘पैसा आने का मैसेज’ गूंजने लगेगा।

सियासी गलियारों में चर्चा: क्या यह केंद्र बनाम राज्य की नई जंग है?

शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि यह फैसला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र से ₹850 करोड़ मांगे गए थे, लेकिन मिला ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर। वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹253 करोड़ की मांग के खिलाफ केंद्र ने मात्र ₹33.57 करोड़ ही आवंटित किए। ऐसे में राज्य सरकार ने ‘अपने दम पर’ स्कॉलरशिप देकर केंद्र को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है।


अगला कदम: अब क्या होगा?

अब गेंद वित्त विभाग के पाले में है। जैसे ही टोकन मनी और फंड रिलीज की प्रक्रिया पूरी होगी, ‘ई-कल्याण पोर्टल’ के जरिए डेटा वेरिफिकेशन शुरू होगा। छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे अपना आधार सीडिंग और बैंक खाता अपडेट रखें ताकि तकनीकी कारणों से स्कॉलरशिप न फंसे।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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