रांची: झारखंड में आगामी लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) को लेकर सियासी सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सूबे के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने रांची के मोराबादी राज्य अतिथि गृह में एआईसीसी झारखंड प्रभारी के. राजू से हाई-प्रोफाइल मुलाकात की है।
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में हुई इस बैठक में झारखंड के सभी 24 जिलों के सामाजिक संगठनों, कानून विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। डेलिगेशन ने दो टूक कहा है कि देश में सीटें भले ही बढ़ें, लेकिन आदिवासियों की आरक्षित सीटों में रत्ती भर भी कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बीच बड़ी खबर यह है कि झारखंड का यह प्रतिनिधिमंडल जल्द ही दिल्ली में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेगा। इसके साथ ही राहुल गांधी को आगामी 30 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में होने वाली ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का न्यौता भी दिया गया है।
“सीटें बढ़ीं तो हमारा कोटा भी 50% बढ़े”, दिल्ली तक गूंजेगी आवाज
ग्राउंड जीरो से मिल रही खबरों के मुताबिक, झारखंड के आदिवासी समाज में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि नए परिसीमन के फॉर्मूले से कहीं उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम न हो जाए। बैठक में शामिल कानूनी विशेषज्ञों ने साफ किया कि इसके लिए संविधान में संशोधन बेहद जरूरी है।
“कांग्रेस पार्टी ने हमेशा आदिवासी समाज के हक की लड़ाई लड़ी है। आगामी परिसीमन प्रक्रिया में यह हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए कि झारखंड में अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित किसी भी विधानसभा या लोकसभा सीट में कटौती न हो।”
— बंधु तिर्की, पूर्व मंत्री एवं प्रतिनिधिमंडल प्रमुख
संविधान में संशोधन की मांग, जानिए क्या है पूरा गणित
अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना ने बैठक में एक बड़ा विधिक फॉर्मूला पेश किया। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में आदिवासी आरक्षित सीटों को सुरक्षित रखना है, तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) में जरूरी बदलाव करने होंगे।
- 50% वृद्धि का फॉर्मूला: यदि देश भर में लोकसभा और विधानसभाओं की कुल सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाती है, तो एसटी (ST) और एससी (SC) के लिए आरक्षित सीटों में भी वर्तमान संख्या के अनुपात में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
- विधिक प्रारूप तैयार: झारखंड हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषिश रशीक सोरेन और एनयूएसआरएल (NUSRL) के सहायक प्राध्यापक डॉ. रामचंद्र उरांव ने परिसीमन से जुड़े कानूनी पहलुओं का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे राहुल गांधी के सामने रखा जाएगा।
सरना धर्म कोड का मुद्दा भी गरमाया
इस महत्वपूर्ण बैठक में सिर्फ सीटों का ही नहीं, बल्कि पहचान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनगणना में अब तक ‘सरना धर्म कोड’ लागू नहीं किया गया है, जिससे आदिवासियों की धार्मिक पहचान खतरे में है। उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर उठाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल की इन गंभीर चिंताओं को सुनने के बाद एआईसीसी प्रभारी के. राजू ने भरोसा दिया है कि वे जल्द ही राहुल गांधी के साथ इस डेलिगेशन की बैठक फिक्स कराएंगे। उन्होंने भी माना कि सीटों की संख्या बढ़ने पर आदिवासियों के आरक्षण का अनुपात उसी हिसाब से बढ़ना चाहिए।
झारखंड के इस कदम ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के सामने एक नई लकीर खींच दी है। डेलिगेशन का यह विधिक ड्राफ्ट अगर राहुल गांधी के जरिए संसद में गूंजता है, तो परिसीमन की पूरी बहस का रुख बदल सकता है। फिलहाल सबकी नजरें 30 अगस्त 2026 को रांची में होने वाली ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ पर टिकी हैं, जो सूबे की भावी राजनीति की दिशा तय करेगी।











