Ranchi : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) कार्यालय में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब सीआईडी (CID) की विशेष टीम ने अचानक जोरदार दबिश दी। JSSC CGL परीक्षा विवाद को लेकर चल रही जांच के तहत जांच एजेंसी सीधे आयोग के दफ्तर पहुंची और रिकॉर्ड्स को कब्जे में लेना शुरू कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, सीआईडी की टीम कार्यालय के भीतर बेहद गोपनीय तरीके से दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। छापेमारी की खबर फैलते ही प्रशासनिक गलियारों से लेकर अभ्यर्थियों के बीच खलबली मच गई है।
इस कार्रवाई का सीधा असर राज्य के उन लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, जो लंबे समय से परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सड़कों पर आवाज उठा रहे थे।
JSSC सचिव से बंद कमरे में पूछताछ, आवास के बाद दफ्तर पर एक्शन
सीआईडी की टीम आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से सीधे पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारी परीक्षा प्रक्रिया, टेंडर आवंटन और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से जुड़े तमाम पहलुओं पर सीधे सवाल-जवाब कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस दबिश से ठीक पहले जांच एजेंसी ने सचिव के निजी आवास पर भी छापेमारी की थी। वहां से मिले इनपुट्स और डिजिटल सुरागों के आधार पर ही आज आयोग कार्यालय में रिकॉर्ड्स और फाइलों का मिलान किया जा रहा है।
पास छात्रों के दस्तावेजों की होगी गहन स्क्रूटनी
सीआईडी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा:
- सफल अभ्यर्थियों की स्क्रूटनी: परीक्षा में सफल घोषित किए गए सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों, ओएमआर शीट और बायोमेट्रिक डेटा की विस्तृत फोरेंसिक जांच की जाएगी।
- डिजिटल और हार्ड कॉपी का मिलान: सर्वर रूम के डेटा लॉग्स, अटेंडेंस शीट्स और परीक्षा केंद्रों से आए सीलबंद लिफाफों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
- बिचौलियों और सिंडिकेट पर नजर: संलिप्तता का कोई भी तकनीकी प्रमाण मिलते ही तुरंत सख्त कानूनी धाराओं के तहत गिरफ्तारी की तैयारी है।
सिस्टम की सख्ती या परीक्षा पर बड़ा फैसला?
सीआईडी की इस आक्रामक कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियां मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही बख्शने के मूड में नहीं हैं। यदि दस्तावेजों की स्क्रूटनी में किसी संगठित सिंडिकेट या धांधली के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो कई बड़े चेहरों पर कानूनी शिकंजा कसना तय है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या आयोग के स्तर पर कोई बड़ा प्रशासनिक बदलाव या परीक्षा को लेकर नया फैसला सामने आता है।











