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JPSC Scam: पूर्व सदस्य से पूछताछ, CID का 5 जिलों में शिकंजा

Ranchi | झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC Scam) मामले में सीआईडी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. अनिमा हांसदा से कड़ी पूछताछ के बाद जांच एजेंसी ने पांच जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है।

परीक्षा संचालन, एजेंसी चयन और ओएमआर शीट में हेराफेरी को लेकर सीआईडी अधिकारियों ने डॉ. हांसदा से कई तीखे सवाल पूछे। हालांकि, उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए सारा जिम्मा पूर्व अध्यक्ष के फैसलों पर टाल दिया है।

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इस बड़े खुलासे के बाद जहां महकमे में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं 7 फरार बिचौलियों और कोचिंग संचालकों की गिरफ्तारी के लिए सीआईडी ने कुर्की-जब्ती की तैयारी तेज कर दी है।

CID के सवालों पर बोलीं पूर्व सदस्य- ‘एजेंसी चयन पूर्व अध्यक्ष के स्तर से हुआ’

सीआईडी की टीम ने शुक्रवार को जेपीएससी की तीसरी पूर्व सदस्य डॉ. अनिमा हांसदा का विस्तृत बयान दर्ज किया। जांच एजेंसी ने उनसे परीक्षा संचालित करने वाली विवादित एजेंसी ‘टीडीपीएल’ के चयन और कथित वसूली नेटवर्क को लेकर पूछताछ की।

पूछताछ में क्या बोलीं डॉ. अनिमा:

“वर्तमान में जो भी गड़बड़ी के मामले चल रहे हैं, उसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। एजेंसी का चयन पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के माध्यम से ही हुआ था। मैं केवल प्रशासनिक कार्यों पर नजर रखती थी और मुझे किसी अनियमितता की भनक तक नहीं थी।”

इससे पहले सीआईडी दो अन्य पूर्व सदस्यों—डॉ. अजिता भट्टाचार्य (10 अगस्त) और डॉ. जमाल अहमद (12 अगस्त) से पूछताछ कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों ने इन दोनों सदस्यों के एजेंटों के जरिए वसूली कराने का दावा किया था, जबकि डॉ. अनिमा के खिलाफ अब तक किसी आरोपी ने सीधा बयान नहीं दिया है।

2 करोड़ की डील और कंप्यूटर ऑपरेटर का सनसनीखेज कबूलनामा

सीआईडी की रिमांड पूछताछ में पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार और ‘बिंसिस टेक्नोलॉजी’ के निदेशक अरुण कुमार (उर्फ अरुण शर्मा) को आमने-सामने बिठाया गया।

  • धर्मेंद्र का कबूलनामा: उसने स्वीकार किया कि पूर्व अध्यक्ष उस पर पूरा भरोसा करते थे। वह उनके लिए वसूली से लेकर परीक्षा एजेंसी की सेटिंग तक के काम में सीधे तौर पर शामिल था।
  • 2 करोड़ की डील: बिंसिस के निदेशक अरुण कुमार ने माना कि आयोग में काम पाने के लिए 2 करोड़ रुपये का सौदा तय हुआ था, जिसे धर्मेंद्र ने ही कराया था।

5 जिलों में 7 वांटेड बिचौलियों की तलाश, होगी कुर्की-जब्ती

मेधा घोटाले में अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने और ‘सेटिंग’ कराने वाले 7 कोचिंग संचालकों व दलालों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है। सीआईडी लगातार दूसरे दिन 5 जिलों में दबिश दे रही है:

आरोपी का नामजिला / थाना क्षेत्रभूमिका
आदित्य पांडेयनामकुम (पेप्सी ग्राउंड), रांचीबिचौलिया / एजेंट
पवन कुमार सिंहटाटीसिलवे (हरिनगर), रांचीबिचौलिया / एजेंट
रवि शंकर कुमारटाउन थाना, पलामूबिचौलिया / एजेंट
संतोष कुमार सिंहहमीदगंज, पलामूबिचौलिया / एजेंट
सानंद प्रकाशसेक्टर-3, बोकारो स्टील सिटीबिचौलिया / एजेंट
लालू कुमार यादवकोर्रा (सदर थाना), हजारीबागकोचिंग संचालक / एजेंट
सौरभ कुमार पांडेयहथगर (बेंगाबाद), गिरिडीहबिचौलिया / एजेंट

अल्टीमेटम: सीआईडी ने स्पष्ट किया है कि यदि इन सातों आरोपियों ने जल्द आत्मसमर्पण नहीं किया या वे पकड़े नहीं गए, तो अदालत से आदेश लेकर उनके ठिकानों की कुर्की-जब्ती की जाएगी।

454 सफल अभ्यर्थियों की OMR शीट गायब, रडार पर संदिग्ध

जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कुल 2,204 अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी मांगी गई थी:

  • सत्यापन जारी: अब तक प्राप्त 1,750 ओएमआर शीट की फॉरेंसिक और तकनीकी स्क्रूटनी की जा रही है।
  • संदिग्ध दायरा: 454 अभ्यर्थियों ने अभी तक अपनी ओएमआर शीट जमा नहीं की है। सीआईडी इन्हें प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानकर इनके परीक्षा केंद्रों और अंकों की गहन पड़ताल कर रही है।

आयोग की साख और छात्रों का भविष्य

सीआईडी अब ओएमआर शीट में हेराफेरी के डिजिटल फुटप्रिंट्स और वित्तीय लेन-देन के तार जोड़ने में जुटी है। फरार सात बिचौलियों की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं। वहीं, 454 संदिग्ध अभ्यर्थियों की जांच पूरी होते ही प्रारंभिक परीक्षा परिणाम पर आयोग बड़ा फैसला ले सकता है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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