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झुमकों से लेकर साड़ियों तक, जानिये क्या हैं एण्डटीवी के कलाकारों के खास कलेक्शन्स!

फैशन सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं होता है, बल्कि यह व्यक्तित्व, संस्कृति और यादगार लम्हों को प्रदर्शित करने का भी एक जरिया है। हममें से अधिकतर लोगों के पास निश्चित रूप से कुछ कपड़े ऐसे होते हैं, जो हमारे दिल में खास जगह रखते हैं। ये केवल स्टाइल ही नहीं, बल्कि भावनाओं और कहानियों से भी जुड़े होते हैं। एण्डटीवी के कलाकारों – स्मिता सेबल (‘भीमा‘ की धनिया), गीतांजलि मिश्रा (‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की राजेश) और शुभांगी अत्रे (‘भाबीजी घर पर हैं‘ की अंगूरी भाबी) ने अपने उस खास कलेक्शन के बारे में बताया, जो पारंपरिक और आधुनिक दोनों ही तरह के फैशन के प्रति उनके प्रेम को बेहद खूबसूरती से दर्शाता है।

स्मिता सेबल को कुर्तियों से है खास लगाव

स्मिता सेबल ऊर्फ ‘भीमा‘ की धनिया ने कहा, “मुझे कुर्तियों से प्यार कॉलेज के दिनों में हुआ था और तब से ये बस बढ़ता ही गया।” मेरी अलमारी में अलग-अलग तरह की कुर्तियां हैं, जो हर मौके और मूड से मैच करती हैं।

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  • मेरे कलेक्शन में मॉडर्न स्टाइल वाले खूबसूरत प्रिंट्स से लेकर भारत की समृद्ध विरासत को दिखाने वाली बारीक हाथ की कढ़ाई वाली कुर्तियों तक सबकुछ शामिल है।
  • त्योहारों पर अनारकली कुर्तियां पहनना मुझे पसंद है, जो मुझे शाही और खास महसूस करवाती हैं।
  • कैजुअल आउटिंग्स या रोजाना पहनने के लिए सॉफ्ट कॉटन कुर्तियां सबसे आरामदायक होती हैं।
  • वहीं, टसल और मिरर वर्क वाली बोहो-स्टाइल कुर्तियां मेरे लुक में थोड़ा फन और मस्ती जोड़ देती हैं।

मेरे कलेक्शन की हर कुर्ती मेरी पर्सनैलिटी को दिखाती है और मुझे फैशन के साथ कुछ नया करने का मौका देती है।

गीतांजलि मिश्रा को झुमकों का है शौक

गीतांजलि मिश्रा ऊर्फ ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की राजेश कहती हैं, “मुझे झुमकों से बहुत ज्यादा प्यार है और वो मेरी ज्वेलरी कलेक्शन का एक अभिन्न हिस्सा हैं।”

  • झुमकों का लटकना और झनकार बेहद दिलकश होती है।
  • मेरे पास पारंपरिक झुमके, रंग-बिरंगे मीनाकारी झुमके, ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर झुमके, और मोतियों से सजे झुमके हैं।
  • यह किसी भी साधारण आउटफिट में चार चांद लगा देते हैं।
  • मेरे कलेक्शन का हर झुमका खास है, जो भारत की समृद्ध संस्कृति और कलाकारी को दर्शाता है।

शुभांगी अत्रे की साड़ियों के प्रति दीवानगी

शुभांगी अत्रे ऊर्फ ‘अंगूरी भाबी’ ने कहा, “साड़ियां मेरे लिए सिर्फ एक परिधान नहीं हैं; ये मेरे जज्बात और जड़ों से जुड़ने का जरिया हैं।”

  • बचपन से मैंने अपनी मां को साड़ी में देखा और यही लगाव बन गया।
  • मेरे कलेक्शन में कांजीवरम सिल्क, बनारसी सिल्क, और शिफॉन की हल्की साड़ियां शामिल हैं।
  • मेरी मां का रॉयल ब्लू कांजीवरम, जो 15 साल पहले उन्होंने दिया था, मेरे लिए सबसे खास है।
  • यह सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि भावनाओं और यादों का खजाना है।

निष्कर्ष

फैशन सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का तरीका है। एण्डटीवी के कलाकारों के ये स्पेशल कलेक्शन उनके व्यक्तित्व, संस्कृति और भावनाओं को दर्शाते हैं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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