दिशोम गुरु फ्री कोचिंग का नियम बदला, 10वीं पास की चमकेगी किस्मत!

Subhash Shekhar
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Ranchi | झारखंड के होनहार और जरूरतमंद छात्रों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। राजधानी रांची में संचालित ‘दिशोम गुरु शिबू सोरेन NEET-JEE कोचिंग इंस्टीट्यूट’ के एडमिशन नियमों में सरकार ने एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव कर दिया है।

राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने खुद इस प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान का औचक निरीक्षण (ग्राउंड इंस्पेक्शन) किया। मौके पर बुनियादी ढांचे का जायजा लेने के बाद उन्होंने साफ किया कि अब इस संस्थान में दाखिले का पूरा पैटर्न बदलने जा रहा है, जिससे सीधे मैट्रिक पास छात्रों को फायदा मिलेगा।

मंत्री के इस औचक फैसले के बाद शिक्षा विभाग और प्रबंधन के बीच नए सिरे से तैयारियां तेज हो गई हैं। आइए जानते हैं कि इस ग्राउंड इंस्पेक्शन के बाद क्या कुछ बदलने वाला है और झारखंड के छात्रों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

एडमिशन का नया फॉर्मूला: अब 11वीं-12वीं का झंझट खत्म, सीधे एंट्री!

कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने संस्थान की लाइब्रेरी, हॉस्टल और क्लासरूम्स का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद एक बड़ा नीतिगत फैसला सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक इस कोचिंग संस्थान में 11वीं, 12वीं और उसके बाद के छात्रों को भी शामिल किया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

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कल्याण मंत्री चमरा लिंडा का ऑन-कैमरा बयान: “हम लोग हर साल नए बच्चों को लेंगे। इस बार थोड़ा चेंज कर रहे हैं। यह 10 क्लास पास को करेंगे। 11, 12, 13 भी हम लोग लिया करते थे। लेकिन अब 10 क्लास में ही 200 बच्चों को लेंगे हम लोग। हर बार 10 क्लास को ही लेंगे।”

इस नए नियम के तहत अब संस्थान में हर वक्त कुल 450 छात्रों के रहने और पढ़ाई की मुकम्मल व्यवस्था रहेगी। हर साल पुराने बच्चे नीट-जेईई जैसी कठिन परीक्षाएं पास करके निकलते जाएंगे और उनकी जगह सिर्फ 10वीं पास 200 नए चेहरे इस फ्री कोचिंग कैंपस का हिस्सा बनेंगे।

अगर NEET-JEE नहीं निकला तो? सरकार का ‘Plan-B’ भी तैयार

अक्सर मुफ्त कोचिंग योजनाओं में सबसे बड़ा डर यह होता है कि अगर बच्चा प्रतियोगिता परीक्षा क्रैक नहीं कर पाया, तो उसका साल बर्बाद हो जाता है। लेकिन इस ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान मंत्री जी ने एक बेहद मजबूत बैकअप प्लान (Plan-B) का भी खुलासा किया, जो छात्रों का भविष्य सुरक्षित करेगा।

मंत्री चमरा लिंडा ने साफ कहा कि जो बच्चे अंत में मेडिकल या इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें झारखंड सरकार लावारिस नहीं छोड़ेगी। उनके करियर को सेट करने के लिए संस्थान तीन से चार रास्ते दे रहा है:

  • BSc Nursing: इसके लिए सरकार विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।
  • BIT Polytechnic: तकनीकी शिक्षा के इच्छुक छात्रों को सीधे पॉलिटेक्निक में भेजा जाएगा।
  • BIT Paramedical: संस्थान जल्द ही पैरामेडिकल कोर्सेज भी खोलने जा रहा है।

कब से शुरू होगा एडमिशन और कैसे होगी परीक्षा?

चूंकि झारखंड बोर्ड (JAC) सहित अन्य बोर्ड्स के 10वीं और 12वीं के रिजल्ट्स आ चुके हैं, इसलिए इस योजना को जमीन पर उतारने की जल्दबाजी साफ दिख रही है। जब लोकल स्तर पर प्रबंधन से यह पूछा गया कि एडमिशन प्रोसेस की जानकारी आम जनता और सुदूर इलाकों के बच्चों तक कैसे पहुंचेगी, तो मंत्री ने ऑन-स्पॉट निर्देश जारी किए।

उन्होंने प्रबंधन को आदेश दिया कि एडमिशन का पूरा फॉर्म और प्रोसेस तुरंत फ्रेम (तैयार) करके कल्याण विभाग को सूचित करें। विभाग केवल मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग देखेगा, जबकि एंट्रेंस एग्जाम के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर तारीखों का ऐलान करने तक की पूरी जिम्मेदारी संस्थान की अपनी होगी।

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What Next: आगे क्या होगा?

लोकल खबर एनालिसिस: कल्याण मंत्री चमरा लिंडा के इस कड़े रुख और ऑन-स्पॉट फैसले से साफ है कि झारखंड सरकार इस बार ग्रामीण इलाकों के गरीब बच्चों को कोटा या पटना भेजे बिना, रांची में ही विश्वस्तरीय कोचिंग देने के मूड में है। वर्तमान में हॉस्टल का कुछ अधूरा काम बाकी है, जिसे युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि अगले कुछ ही हफ्तों में एंट्रेंस एग्जाम की तारीखों का आधिकारिक विज्ञापन जारी हो जाएगा, जिससे राज्य के हजारों 10वीं पास छात्रों को सीधा रास्ता मिलेगा।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।