सदान विकास परिषद की बैठक में पेसा कानून लागू करने की मांग, 15 फरवरी तक कमिटी गठन का निर्णय

Subhash Shekhar
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संविधानिक अधिकारों के लिए सदान समाज का बड़ा कदम

रांची। सदान विकास परिषद की संयुक्त बैठक 5 फरवरी 2025, बुधवार को प्रोफेसर हिमांशु नाथ राय के आवास, डिप्टी पाड़ा, पुराना सर्किट हाउस के पास आयोजित हुई। इस बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों का पुनर्गठन कर पेसा कानून को लागू करने की मांग को लेकर राज्य एवं केंद्र सरकार से अपील की गई। परिषद ने यह स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस पर उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो संवैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 फरवरी तक प्रखंड, जिला एवं केंद्रीय समिति का गठन किया जाएगा। इसके बाद, प्रखंड एवं जिला स्तर पर बैठक आयोजित कर आगामी रणनीति तय की जाएगी। परिषद के सदस्यों ने एकजुट होकर कहा कि पेसा कानून लागू करना जरूरी है ताकि सदान समाज को उनके संवैधानिक अधिकार मिल सकें।

सदान समाज के प्रमुख नेता हुए शामिल

बैठक में कई वरिष्ठ नेता एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें अरुण कश्यप, लालचन महतो, दिलीप सोनी, उपेंद्र नारायण सिंह, विजय महतो, अब्दुल खालिद, सत्यप्रकाश मिश्र समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे। इसके अलावा, बेड़ो, भरनो, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, नगड़ी, अनगड़ा, सिल्ली, सोनाहातु, राहे, बुंडू, तमाड़ एवं जमशेदपुर से भी सदान समाज के लोग बैठक में शरीक हुए।

सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले सदान समाज की उपेक्षा कर रही है। पेसा कानून लागू होने से पारंपरिक ग्रामसभा की शक्ति बढ़ेगी और ग्रामीण विकास के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

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सरकार को दी चेतावनी, संघर्ष के लिए तैयार परिषद

बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा कि यदि सरकार इस मांग को गंभीरता से नहीं लेती है, तो सदान विकास परिषद संवैधानिक तरीके से विरोध करेगी। परिषद के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ एक बैठक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बड़े स्तर पर चलाया जाएगा।

सदान समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में विभिन्न जिलों में जनसभाएं की जाएंगी, जिससे समाज के हर व्यक्ति को इस आंदोलन से जोड़ा जा सके। बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि वे अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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