नीति आयोग की बैठक में सोरेन की दो टूक: झारखंड सिर्फ खनिज निकालने वाला राज्य नहीं

Subhash Shekhar
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New Delhi | आयोजित नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा कि झारखंड को केवल खनिज निकालने वाले राज्य के रूप में देखने की पुरानी परंपरा को अब बदलना होगा। मुख्यमंत्री ने देश के सामने ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य के साथ राज्य को नई दिशा देने की एक बड़ी और विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की है।

उन्होंने साफ किया कि झारखंड की खनिज संपदा तभी सार्थक होगी, जब उसे मानव पूंजी से जोड़ा जाए। राज्य की इस विकास यात्रा में केंद्र सरकार को केवल एक मूकदर्शक नहीं, बल्कि एक सक्रिय साझेदार की भूमिका निभानी होगी।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या है सीएम का मास्टर प्लान?

दिल्ली के गलियारों से लेकर रांची के प्रशासनिक हलकों तक इस समय केवल एक ही बात की चर्चा है—झारखंड को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ और ‘नॉलेज इकोनॉमी’ कैसे बनाया जाए। ग्राउंड जीरो से मिल रही खबरों के मुताबिक, राज्य सरकार अब केवल कच्चा माल बाहर भेजने के मूड में नहीं है, बल्कि संसाधनों का वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) राज्य के भीतर ही करने की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र से टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन-ईंधन, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में बड़े निवेश को बढ़ावा देने की पुरजोर वकालत की है। इसके साथ ही, माइनिंग सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेस्ड मिनरल एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिसेज को लागू करने पर काम शुरू हो चुका है।

शिक्षा और पोषण की जमीनी हकीकत

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान यह बात सामने आती है कि राज्य में बुनियादी ढांचे को लेकर चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन प्रयास भी उतने ही आक्रामक हैं। मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया कि राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास अपना भवन नहीं है।

“चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन हम चुप नहीं बैठे हैं। हमारी सरकार अपने दम पर 5000 नए आंगनबाड़ी भवन बना रही है। ‘पोषण अभियान’ और ‘SAAMAR’ योजना के चलते कुपोषण के मोर्चे पर सुधार दिखने लगा है और अब बच्चों को हर दिन अंडा दिया जा रहा है।” — हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री (नीति आयोग की बैठक में)

शिक्षा के क्षेत्र में ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ के नतीजे अब जमीन पर दिखने लगे हैं, जहां से पढ़कर गरीब बच्चे अब IIT और मेडिकल कालेजों में जा रहे हैं। सरकार ऐसे 5000 उत्कृष्ट विद्यालय बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

रोजगार, स्वास्थ्य और डिजिटल गवर्नेंस की नई त्रिवेणी

झारखंड का युवा अब सिर्फ पारंपरिक नौकरियों के भरोसे नहीं है। राज्य सरकार हर साल 1 लाख से अधिक युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ रही है। ‘मुख्यमंत्री सारथी योजना’ के तहत 6.76 लाख युवाओं को हुनरमंद बनाया गया है। सबसे खास बात यह है कि राज्य के युवा अब AI, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), ड्रोन और सोलर टेक्नोलॉजी सीख रहे हैं। इसमें 53 हजार से ज्यादा महिलाओं को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।

पंचायत स्तर तक इलाज और डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल

स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में 1276 दवा दुकानें सीधे तौर पर काम कर रही हैं। राज्य सरकार अब हर नागरिक का ‘AI आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल’ बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे एक क्लिक पर मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास सामने आ जाएगा।

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कृषि से मिटेगा कुपोषण, अंतरराष्ट्रीय बाजार में झारखंड का आम

कृषि को कुपोषण से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार बनाते हुए राज्य में 10 लाख से अधिक ‘पोषण वाटिकाएं’ खड़ी की गई हैं। डेढ़ लाख एकड़ में फलदार पौधे लगाए गए हैं। इसी का नतीजा है कि झारखंड का आम अब देश की सीमाएं लांघकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मिठास बिखेर रहा है।

केंद्र के पाले में गेंद: इन 5 बड़ी मांगों पर फंसा पेंच

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के हक की बात करते हुए नीति आयोग के मंच से केंद्र सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें और लंबित मुद्दे बेहद मजबूती से रखे:

  • कोयला कंपनियों का बकाया: केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली कोयला कंपनियों पर झारखंड का 1.36 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बकाया है, जिसे तुरंत जारी करने की मांग की गई है।
  • जल जीवन मिशन: राज्य में हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए इस मिशन की शेष 6000 करोड़ रुपये की राशि को जल्द रिलीज करने का आग्रह किया गया है।
  • मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी: PPP मोड में बन रहे 6 नए मेडिकल कॉलेजों में से 4 को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि शेष 2 की फाइल अभी भी दिल्ली में अटकी है।
  • जमीन अधिग्रहण में छूट: झारखंड के 7 जिले DVC कमांड एरिया और 12-13 जिले CCL, ECL जैसे केंद्रीय उपक्रमों के तहत आते हैं। यहां सामाजिक विकास के लिए जमीन अधिग्रहण और मालिकाना हक की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग की गई है।
  • स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी: देश को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले झारखंड ने अपने यहां एक केंद्रीय स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मांग दोहराई है।

झारखंड ने अपनी तरफ से ‘सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसे कदम उठाकर यह साबित कर दिया है कि वह भविष्य की रेस के लिए पूरी तरह तैयार है। डिजिटल गवर्नेंस और डेटा शेयरिंग को लेकर राज्य सरकार ने अपनी नीतियां स्पष्ट कर दी हैं।

अब देखना यह होगा कि नीति आयोग की इस हाई-लेवल बैठक के बाद केंद्र सरकार झारखंड के इस आक्रामक और सकारात्मक ब्लूप्रिंट पर कितनी जल्दी कदम उठाती है। 1.36 लाख करोड़ रुपये का कोयला बकाया और जल जीवन मिशन के फंड पर केंद्र का अगला रुख ही तय करेगा कि झारखंड का यह ‘नॉलेज इकोनॉमी’ बनने का सपना कितनी तेजी से रफ्तार पकड़ेगा।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।