लोकल खबर ब्यूरो, रांची: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से परेशान जनता और विदेशी तेल पर भारत की निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर उच्च स्तर के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) को पूरी तरह से हटाकर ‘शून्य’ कर दिया है।
केंद्र के इस बड़े फैसले के बीच झारखंड के पेट्रोल पंप संचालकों के लिए भी राज्य सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है।
इन पेट्रोल वेरिएंट्स पर मिलेगा सीधा फायदा, नोटिफिकेशन जारी
वित्त मंत्रालय द्वारा केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 5A के तहत दी गई यह विशेष छूट उन सभी पेट्रोल वेरिएंट्स पर लागू होगी, जिनमें इथेनॉल की मात्रा 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत (E22 से E30) तक होगी। इसके तहत अब बाजार में आने वाले E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के पेट्रोल को इस टैक्स छूट का सीधा फायदा मिलेगा। हालांकि, इसके लिए ईंधन को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े नियमों और गुणवत्ता पैमानों पर खरा उतरना अनिवार्य होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला? जानिए इसके पीछे का गणित
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल (Crude Oil) दूसरे देशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में होने वाले उतार-चढ़ाव से देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इसी आयात को कम करना और देश के भीतर बनने वाले स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन (Green Fuel) को बढ़ावा देना है।
चूंकि इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, मक्के और अन्य अनाजों से होता है, इसलिए इस नीति से न केवल देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा, बल्कि भारत के करोड़ों किसानों की आमदनी में भी भारी इजाफा होगा।
तय समय से आगे चल रही है भारत की बायोफ्यूल क्रांति
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, साल 2014 में देश के पेट्रोल में सिर्फ 1.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता था, जो नवंबर 2022 तक बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया। सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने (E20) का जो लक्ष्य साल 2030 तक रखा था, उसे तेल कंपनियों के बेहतर तालमेल की वजह से तय समय से बहुत पहले, यानी साल 2024 में ही पूरा कर लिया गया। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए बेहद शक्तिशाली E85 ईंधन भी लॉन्च किया है।
झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल पंपों को वैट रिटर्न से मिली मुक्ति
एक तरफ जहां केंद्र सरकार ने बायोफ्यूल को टैक्स फ्री किया है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के पेट्रोल पंप डीलरों को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत एक बहुत बड़ी सौगात दी है।
वाणिज्य कर विभाग (Commercial Taxes Department) ने ‘झारखंड मूल्य वर्धित कर नियमावली, 2006’ में बड़ा संशोधन करते हुए पेट्रोल-डीजल पर वैट रिटर्न (Quarterly/Monthly VAT Return) दाखिल करने की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
डीलरों को क्यों मिलेगी राहत? झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन लंबे समय से इस कागजी कार्रवाई को खत्म करने की मांग कर रहा था। दरअसल, पेट्रोल पंप संचालक तेल कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) से ईंधन खरीदते वक्त ही एडवांस में वैट (VAT) चुका देते हैं। ऐसे में दोबारा हर महीने या तिमाही में वैट रिटर्न दाखिल करना सिर्फ एक जटिल कागजी प्रक्रिया थी। सरकार के इस फैसले से राज्य के सैकड़ों पंप संचालकों को बड़ी राहत मिली है और इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिलेगी।
झारखंड में अभी क्या है पेट्रोल-डीजल पर टैक्स का ढांचा?
भले ही वैट रिटर्न भरने की प्रक्रिया खत्म हो गई हो, लेकिन राज्य में टैक्स की दरें पूर्ववत रहेंगी। झारखंड में पेट्रोल और डीजल पर फिलहाल 22% वैट लागू है, जिसके साथ सरकार ने एक न्यूनतम फ्लोर रेट और सेस भी तय कर रखा है:
- पेट्रोल: 22% वैट (न्यूनतम ₹17.00/लीटर जो भी अधिक हो) + ₹1.00 प्रति लीटर अतिरिक्त सेस।
- डीजल: 22% वैट (न्यूनतम ₹12.50/लीटर जो भी अधिक हो) + ₹1.00 प्रति लीटर अतिरिक्त सेस।
केंद्र सरकार द्वारा इथेनॉल पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य करना जहां देश को पर्यावरण के अनुकूल और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, वहीं झारखंड सरकार द्वारा वैट रिटर्न की उलझन खत्म करना स्थानीय व्यापार जगत के लिए एक बड़ा बूस्टर डोज साबित होगा।


