पाकिस्तान से तौबा: Spotify और अन्य प्लेटफॉर्म्स से पाकिस्तानी कंटेंट गायब

पाकिस्तान से तौबा: Spotify और अन्य प्लेटफॉर्म्स से पाकिस्तानी कंटेंट गायब

Spotify ने भारत में पाकिस्तानी गानों को अचानक हटा दिया है। रातोंरात इस म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से ‘मांड’, ‘झोल’, ‘फासले’ जैसे लोकप्रिय गाने बिना किसी सूचना के गायब हो गए। यूजर्स को जब अपनी पसंदीदा प्लेलिस्ट में ये गाने नहीं मिले, तो सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।

बताया जा रहा है कि यह फैसला भारत सरकार की 8 मई को जारी एक एडवाइजरी के बाद लिया गया है। इस एडवाइजरी में सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म और ओटीटी सेवाओं को पाकिस्तान में बनी किसी भी मीडिया सामग्री की स्ट्रीमिंग रोकने को कहा गया है।

सुरक्षा चिंताओं के बीच सख्त सरकारी रुख

भारत सरकार ने यह कदम बढ़ती राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उठाया है। ऑपरेशन सिंदूर और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद माहौल संवेदनशील बना हुआ है।

सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत जारी इस निर्देश में कहा गया है कि सभी प्लेटफॉर्म भारत की संप्रभुता और अखंडता को ध्यान में रखते हुए ऐसे किसी कंटेंट को प्रमोट या स्ट्रीम न करें जो देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हो।

सिर्फ गाने नहीं, फिल्मों से भी हटे पाकिस्तानी कलाकार

Spotify के अलावा अन्य प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब म्यूजिक और ओटीटी सेवाओं पर भी इसका असर देखा गया है। पाकिस्तानी कलाकारों को फिल्मों के पोस्टर और दृश्यों से भी हटा दिया गया है।

उदाहरण के तौर पर, ‘सनम तेरी कसम’ के पोस्टर से मावरा होकेन की तस्वीर हटा दी गई है, अब उसमें सिर्फ हर्षवर्धन राणे नजर आते हैं। इसी तरह, ‘रईस’ फिल्म के कुछ दृश्य जिसमें माहिरा खान थीं, अब यूट्यूब म्यूजिक पर उपलब्ध नहीं हैं।

यूजर्स के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कुछ लोग इसे देशहित में उठाया गया ज़रूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे कला और कलाकारों की आज़ादी पर प्रहार मान रहे हैं।

हालांकि सरकार का रुख साफ है – जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, तो किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अब अपनी सामग्री की मॉनिटरिंग और भी सख्ती से करनी होगी।

डिजिटल माध्यमों की नई दिशा

Spotify द्वारा पाकिस्तान से जुड़े गानों को हटाना और पोस्टर्स से पाकिस्तानी कलाकारों की तस्वीरों का गायब होना एक बड़ा संकेत है कि भारत अब डिजिटल स्पेस में भी अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर समझौता नहीं करेगा।

ऐसे में सभी ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अब इस दिशा में अपने कंटेंट और नीतियों की समीक्षा करनी पड़ेगी, ताकि किसी भी सरकारी गाइडलाइन का उल्लंघन न हो।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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