रांची। झारखंड में चिकित्सा क्षेत्र की एक ऐसी बड़ी तस्वीर सामने आ रही है, जो आने वाले दिनों में मरीजों की जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है। राजधानी रांची के बीएनआर चाणक्य होटल में झारखंड ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन और जॉनसन एंड जॉनसन की एक हाई-लेवल बैठक हुई। इसमें देशभर के दिग्गज डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि ‘स्वस्थ झारखंड’ के निर्माण में अब रोबोटिक सर्जरी सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित होने जा रही है।
इस अहम बैठक में मेडिकल एक्सपर्ट्स ने ऑर्थोपेडिक सर्जरी में तेजी से पैर पसार रही डिजिटल तकनीक और खासकर घुटने के रिप्लेसमेंट (नी 360*) को लेकर बेहद चौंकाने वाले और राहत देने वाले तथ्य साझा किए। बड़े शहरों तक सीमित रहने वाली यह रोबोटिक तकनीक अब आपके शहर रांची में भी घुटने और जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों को नई जिंदगी देने के लिए तैयार है।
’वैलीज’ रोबोट की एंट्री: रांची के डॉक्टरों ने मैदान से क्या कहा?
बैठक के दौरान जब हमारी टीम ने ग्राउंड पर डॉक्टरों से बात की, तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। रांची के प्रख्यात ऑर्थोपेडिक चिकित्सक डॉ. रजनीश ने बताया कि इस बैठक में जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के अत्याधुनिक रोबोट ‘वैलीज’ (Velys) का लाइव प्रदर्शन और एक्सपर्ट्स द्वारा ट्रेनिंग दी गई।
”समय के साथ तकनीक बदल रही है। पहले पारंपरिक तरीके से होने वाला घुटना प्रत्यारोपण भी सफल था, लेकिन अगर नई तकनीक से परिणाम और बेहतर आ रहे हैं, तो हमें इसे तुरंत अपनाना चाहिए। दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के बाद अब रांची भी इस आधुनिक फेहरिस्त में शुमार हो चुका है।”
— डॉ. रजनीश, ऑर्थोपेडिक चिकित्सक

कम खर्च, कम दर्द: क्या सच में आम जनता के बजट में होगी यह सर्जरी?
झारखंड जैसे राज्य में जहां जोड़ों और घुटनों की समस्या से पीड़ित लोगों की संख्या काफी ज्यादा है, वहां सबसे बड़ा सवाल बजट और पहुंच का होता है। इस पर ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मनोज कुमार खेमानी ने मरीजों की सबसे बड़ी चिंता को दूर किया।
डॉ. खेमानी ने सीधे शब्दों में कहा कि रोबोटिक सर्जरी मरीजों के लिए बेहद किफायती और लाभप्रद साबित होने वाली है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए अब मरीजों को राज्य से बाहर भागने की जरूरत नहीं है, बल्कि रांची में ही वर्ल्ड-क्लास इलाज मिलेगा।
- तेजी से रिकवरी: इसमें मरीज बहुत कम समय में ठीक होकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है।
- कम चीर-फाड़ और कम दर्द: इस तकनीक में पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले खून कम बहता है और दर्द न के बराबर होता है।
- किफायती इलाज: कम दिनों तक अस्पताल में रुकने के कारण मरीजों का कुल खर्च भी काफी घट जाता है।
बड़ा भ्रम दूर: रोबोट नहीं, बल्कि आपका डॉक्टर ही करेगा ऑपरेशन
आम जनता के बीच रोबोटिक सर्जरी को लेकर एक डर और गलतफहमी हमेशा रहती है कि क्या रोबोट खुद चीर-फाड़ करेगा? इस भ्रम को रांची के मशहूर ऑर्थोपेडिक चिकित्सक और माँ रामप्यारी हॉस्पिटल के अध्यक्ष डॉ. एस. एन. यादव ने पूरी तरह खारिज कर दिया। डॉ. यादव खुद पिछले तीन वर्षों से इस रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
”लोगों को यह समझना होगा कि रोबोट खुद से कोई ऑपरेशन नहीं करता है। ऑपरेशन पूरी तरह डॉक्टर ही करता है। रोबोट केवल डॉक्टर के निर्देशों पर हड्डियों की सही नाप (Accurate Measurement) और सटीक अलाइनमेंट में एक सहायक (असिस्टेंट) की भूमिका निभाता है। इससे इंसानी चूक की गुंजाइश खत्म हो जाती है।”
— डॉ. एस. एन. यादव, अध्यक्ष, माँ रामप्यारी हॉस्पिटल
व्हाट नेक्स्ट (What Next): भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
होटल बीएनआर चाणक्य में जुटे डॉक्टरों का मानना है कि झारखंड में रोबोटिक सर्जरी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, यह तकनीक डॉक्टरों और मरीजों दोनों का समय बचाएगी। हालांकि, ऑर्थोपेडिक चिकित्सक डॉ. नितेश प्रिय ने एक बेहद व्यावहारिक और जरूरी बात भी सामने रखी।
डॉ. नितेश ने कहा कि पश्चिमी देशों से आई इस सफल विधि को छोटे शहरों में लागू करते समय हमें ‘भारतीय तकनीकी अनुसंधान’ (Indian Research Data) की भी जरूरत है। जैसे-जैसे डॉक्टरों और अस्पतालों में इस तकनीक का उपयोग बढ़ेगा, आम जनता का भरोसा भी मजबूत होगा। फिलहाल, रांची के डॉक्टरों की यह डिजिटल छलांग झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए तैयार है।











