Ranchi | झारखंड के 211 संविदा विशेष शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक बेहद राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से अपने भविष्य और सेवा विस्तार को लेकर अनिश्चितता के साए में जी रहे इन शिक्षकों के मामले में शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को कड़ा और स्पष्ट निर्देश दिया है।
अदालत ने साफ कर दिया है कि केवल ‘जे-टेट’ (JTET) की योग्यता न होने के आधार पर इन शिक्षकों के दावों को अब खारिज नहीं किया जा सकता। सरकार को इस पूरे विवाद पर अगले दो महीने के भीतर न्यायसंगत फैसला लेने का अल्टीमेटम मिला है।
क्या है पूरा मामला और अदालत में क्या हुआ?
यह मामला ‘राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य’ से जुड़ा हुआ है। 4 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान जब अदालत के सामने आंकड़े रखे गए, तो पता चला कि राज्य में कार्यरत 211 संविदा विशेष शिक्षकों में से केवल 33 शिक्षकों के पास ही जे-टेट की योग्यता है।
“सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च 2025 के अपने ऐतिहासिक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए दोहराया कि विशेष शिक्षकों के मामले में भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा तय की गई योग्यता ही सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक है।”
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि राज्य सरकार JTET को अनिवार्य शर्त बनाकर इन शिक्षकों को प्रक्रिया से बाहर नहीं कर सकती।
JSSC परीक्षा देने वाले शिक्षकों को भी मिला सुरक्षा कवच
अदालत ने उन शिक्षकों की चिंता का भी समाधान किया जिन्होंने हाल में JSSC की परीक्षा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- जिन संविदा शिक्षकों ने JSSC परीक्षा दी है, उनका भविष्य केवल परीक्षा परिणाम के आधार पर तय नहीं होगा।
- सरकार को 7 मार्च 2025 के आदेश के तहत तय की गई व्यापक प्रक्रिया को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ना होगा।
“बरसों के संघर्ष के बाद अब जगी है न्याय की आस”
ग्राउंड से मिली जानकारी के मुताबिक, इस फैसले के आते ही रांची से लेकर राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात संविदा विशेष शिक्षकों के चेहरे पर राहत देखने को मिली।
विभाग के चक्कर काट-काटकर थक चुके शिक्षकों ने फैसले का स्वागत किया है। एक पीड़ित शिक्षक ने भावुक होकर बताया:
“हम वर्षों से बिना किसी स्थायी भविष्य के अपनी सेवाएं दे रहे थे। जे-टेट के नाम पर हमें बाहर करने की तैयारी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने RCI गाइडलाइंस को तवज्जो देकर हमारे साथ न्याय किया है। अब उम्मीद है कि हेमंत सोरेन सरकार दो महीने के भीतर हमारे हक में फैसला लेगी।”
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब गेंद झारखंड सरकार और शिक्षा विभाग के पाले में है।
- दो महीने की समय-सीमा: शिक्षा विभाग को 211 शिक्षकों की सेवा शर्त और आरसीआई मानकों की समीक्षा करके नीतिगत फैसला लेना होगा।
- संभावित समायोजन: यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट के रुख को अपनाती है, तो इन शिक्षकों को समायोजन या नियमितीकरण का रास्ता मिल सकता है।
- प्रशासनिक हलचल: माना जा रहा है कि विभाग जल्द ही इस संबंध में विधिक राय लेकर कैबिनेट या विभागीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार करेगा।











