रांची: हटिया सिंहमोड़ हादसे में घायल के लिए फरिश्ता बने इंद्रजीत सिंह

रांची: हटिया सिंहमोड़ हादसे में घायल के लिए फरिश्ता बने इंद्रजीत सिंह

रांची (हटिया)| राजधानी रांची के हटिया सिंहमोड़ पर सोमवार को उस वक्त मानवता शर्मसार होते-होते बची, जब एक भीषण सड़क हादसे के बाद लहूलुहान पड़ा शख्स सड़क पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। तमाशबीनों की भीड़ मोबाइल से वीडियो बनाने में मशगूल थी, लेकिन तभी वहां पहुंचे कांग्रेस नेता और समाजसेवी इंद्रजीत सिंह ने कुछ ऐसा किया जिसकी चर्चा पूरे शहर में हो रही है। उन्होंने न केवल प्रोटोकॉल तोड़ा, बल्कि अपनी गाड़ी को ‘एम्बुलेंस’ बनाकर घायल को अस्पताल पहुंचाया और उसकी उखड़ती सांसों को नई जिंदगी दी।

खून से लथपथ था अज्ञात शख्स, मूकदर्शक बनी रही भीड़

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना जबरदस्त था कि तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आने के बाद घायल व्यक्ति कई फीट दूर जाकर गिरा। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों से भारी खून बह रहा था। सिंहमोड़ जैसे व्यस्त इलाके में सैकड़ों लोग जमा हो गए, पर ‘पुलिस केस’ और झंझट के डर से कोई आगे नहीं आ रहा था। ठीक उसी वक्त वहां से गुजर रहे इंद्रजीत सिंह की नजर भीड़ पर पड़ी।

इंद्रजीत सिंह की तत्परता: बिना देर किए अस्पताल की ओर दौड़

जैसे ही इंद्रजीत सिंह को मामले की गंभीरता समझ आई, उन्होंने समय गंवाए बिना अपनी गाड़ी रुकवाई। खून की परवाह किए बिना उन्होंने घायल को अपनी कार की पिछली सीट पर लिटाया और सीधे नजदीकी अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने न केवल डॉक्टरों से बात कर तुरंत इलाज शुरू करवाया, बल्कि घायल के पास मिले दस्तावेजों के आधार पर कड़ी मशक्कत के बाद उसके परिजनों से संपर्क भी साधा।

रिम्स रेफर करने की खुद की व्यवस्था

घायल की स्थिति गंभीर देखते हुए जब डॉक्टरों ने उसे रिम्स (RIMS) रेफर करने की सलाह दी, तो इंद्रजीत सिंह ने सरकारी प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय निजी स्तर पर व्यवस्था की ताकि इलाज में एक मिनट की भी देरी न हो। उन्होंने खुद खड़े होकर उसे एम्बुलेंस में शिफ्ट करवाया और परिजनों के पहुंचने तक अस्पताल में ही डटे रहे।


ग्राउंड रिपोर्ट: “वीडियो बनाने वालों के दौर में मानवता अभी जिंदा है”

सिंहमोड़ के स्थानीय दुकानदार राजेश महतो कहते हैं, “आजकल लोग मदद के बजाय वीडियो बनाने को प्राथमिकता देते हैं। अगर इंद्रजीत सिंह 10 मिनट और देर करते, तो शायद वह व्यक्ति बच नहीं पाता।” यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के ठीक बाद का एक घंटा) में मदद करना कितना जरूरी है।

इंद्रजीत सिंह का बयान: “राजनीति बाद में, मानवता पहले”

जब हमारी टीम ने इंद्रजीत सिंह से बात की, तो उन्होंने बेहद सादगी से कहा:

“मानवता से बढ़कर दुनिया में कोई दूसरा धर्म नहीं है। राजनीति और समाजसेवा का असली मकसद ही लोगों के काम आना है। उस वक्त मेरे सामने सिर्फ एक इंसान की जान बचाना प्राथमिकता थी। मैं सभी से अपील करता हूं कि सड़क हादसे में घायलों की मदद के लिए डरे नहीं, कानून अब मददगारों के साथ है।”

क्या कहता है कानून? (Expert View)

सुप्रीम कोर्ट के ‘गुड सेमेरिटन’ (Good Samaritan) कानून के अनुसार, सड़क हादसे में मदद करने वाले व्यक्ति को पुलिस या अस्पताल प्रशासन परेशान नहीं कर सकता। न ही उसे गवाही के लिए मजबूर किया जा सकता है। इंद्रजीत सिंह का यह कदम इसी कानून की भावना को धरातल पर उतारता है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment