रांची में दुर्गा पूजा की धूम तो हर साल रहती है, लेकिन रामलीला का मंचन यहां बेहद खास होता है। लंबे इंतजार के बाद इस बार धुर्वा सेक्टर-2 के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में नाटकीय रूप से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले 10 सालों से यहां केवल टीवी पर रामायण दिखाकर ही कार्यक्रम पूरा किया जाता था।
रामलीला मैदान का गौरवशाली इतिहास
आयोजन समिति के अध्यक्ष कमल ठाकुर ने बताया ‘रामलीला मैदान का इतिहास बेहद पुराना है। पहली बार यहां 1967 में रामलीला का मंचन हुआ था। उस समय HEC प्रबंधन कर्मचारियों के वेतन से अंशदान काटकर इस आयोजन को संपन्न करता था। धीरे-धीरे यह परंपरा आगे बढ़ती गई और 25वें वर्ष पर रामलीला का मंचन शहीद मैदान में बड़े स्तर पर किया गया था। तब दिल्ली से भी कलाकार आए थे।
लेकिन 2012 के बाद HEC की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी और रामलीला का मंचन थम गया। तब स्थानीय युवाओं ने जिम्मेदारी उठाई और रामायण सीरियल को बड़े पर्दे पर दिखाकर इस परंपरा को जीवित रखा। अब 10 साल बाद फिर से मंच पर कलाकारों द्वारा नाटकीय रूप में रामलीला दिखाई जाएगी।
कलाकार और तैयारी
आयोजन समिति के सचिव ने कहा- इस बार कलाकार उत्तर प्रदेश के हरदोई और सीतापुर से बुलाए गए हैं। आयोजन समिति ने 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक रोजाना अलग-अलग प्रसंगों पर रामलीला प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है। उद्घाटन गणेश पूजा से होगा और समापन रावण दहन के साथ।
पूरे कार्यक्रम का बजट करीब 6 से 7 लाख रुपए तक पहुंच गया है। चूंकि स्थानीय स्तर पर अब कलाकारों की कमी है, इसलिए बाहर से कलाकार बुलाना पड़ा। फंड की व्यवस्था समिति के सदस्यों, प्रायोजकों और स्थानीय समाज के सहयोग से की गई है।
रामलीला का महत्व
आज की पीढ़ी जहां मोबाइल गेम्स और रील्स में खोती जा रही है, वहीं रामलीला बच्चों को धर्म, संस्कृति और मर्यादा का पाठ पढ़ाने का जरिया है। आयोजकों का मानना है कि रामलीला सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कार देने का एक माध्यम है।
राम, लक्ष्मण, सीता जैसे पात्रों को बच्चे पहचानते हैं, लेकिन बाली और सुग्रीव जैसे किरदार अब उनकी स्मृतियों से धुंधले हो गए हैं। इस रामलीला के जरिए आयोजक चाहते हैं कि नई पीढ़ी हमारी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सके।
दर्शकों की सुविधा
हजारों दर्शकों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए नगर निगम से शौचालय और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कराई गई है। बारिश से बचाव के लिए पंडाल भी लगाया गया है। आयोजकों का कहना है कि इस बार का मंचन ऐतिहासिक होगा और पूरे रांची ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों से भी लोग रामलीला देखने आएंगे।
रांची का यह रामलीला मंचन न केवल एक धार्मिक आयोजन है बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही धरोहर को संजोने का प्रयास भी है। दुर्गा पूजा के बीच यह रामलीला रांची की पहचान बन चुकी है। अगर आप इस बार रांची में हैं, तो शाम 6:30 से रात 10 बजे तक धुर्वा सेक्टर-2 रामलीला मैदान पहुंचकर इस अनूठे आयोजन का हिस्सा जरूर बनें।
👉 तो क्या आप इस रामलीला का हिस्सा बनेंगे? अपने विचार हमें कमेंट करके जरूर बताइए।










