शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 इस वर्ष सोमवार, 22 सितम्बर 2025 से आरम्भ होकर शुक्रवार, 03 अक्टूबर 2025 तक मनाई जाएगी। यह नौ दिवसीय उत्सव माँ दुर्गा और उनकी नौ शक्तियों की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। पूरे देश में विशेषकर झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिशा और उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है।
इस लेख में हम शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 के सभी महत्वपूर्ण दिन, पूजा विधि, व्रत कथा, शुभ मुहूर्त, अनुष्ठान, विशेष कार्यक्रम और धार्मिक महत्व की सम्पूर्ण जानकारी विस्तार से प्रस्तुत करेंगे।
शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 का महत्व
शारदीय नवरात्रि को शक्ति की उपासना का पर्व कहा जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में माँ दुर्गा पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच आती हैं और उनकी सभी बाधाओं, संकटों और दुखों का निवारण करती हैं। दुर्गा पूजा विशेष रूप से बंगाल और झारखंड में एक सांस्कृतिक पर्व का रूप ले चुकी है। इस दौरान मंदिरों, पंडालों और घरों में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है और भक्तगण उपवास, भजन, कीर्तन और विशेष अनुष्ठानों के माध्यम से देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 तिथि एवं शुभ मुहूर्त
नवरात्रि प्रारंभ – प्रतिपदा
📅 22 सितम्बर 2025, सोमवार
➡️ कलश स्थापना, पंचांग पूजन, पंडाल एवं पूजन आरम्भ
🕐 समय: सुबह 08:00 से 11:00 बजे तक एवं संध्या 6:00 बजे
द्वितीया से पंचमी तक
📅 23 सितम्बर 2025 से 27 सितम्बर 2025
➡️ दुर्गा चण्डी पाठ एवं अनुष्ठान
🕐 समय: प्रतिदिन सुबह 08:00 से 11:00 बजे एवं संध्या 6:00 बजे
षष्ठी (बेलवरन समारोह)
📅 28 सितम्बर 2025, रविवार
➡️ बेलवरन, नवरात्रि आयोजन की औपचारिक शुरुआत
🕐 संध्या 4:00 बजे से
सप्तमी (नवरात्रि महापूजन)
📅 29 सितम्बर 2025, सोमवार
➡️ नवपत्रिका पूजन, देवी-देवताओं का पूजन
🕐 सुबह 08:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
अष्टमी (महाअष्टमी एवं संधि पूजा)
📅 30 सितम्बर 2025, मंगलवार
➡️ सभी देवी-देवताओं का पूजन, महाअष्टमी हवन
🕐 संधि पूजा: 01:45 दोपहर से
नवमी (महानवमी हवन एवं कुमारी पूजन)
📅 01 अक्टूबर 2025, बुधवार
➡️ हवन, कुमारी पूजन एवं कन्या भोज
🕐 सुबह 09:00 से 12:00 बजे तक
दशमी (विजयादशमी एवं विसर्जन)
📅 02 अक्टूबर 2025, गुरुवार
➡️ देवी विसर्जन, विजयादशमी समारोह, अखण्ड दीप विसर्जन
🕐 सुबह 11:00 बजे से
एकादशी (समापन अनुष्ठान)
📅 03 अक्टूबर 2025, शुक्रवार
➡️ माता का गोसावारि, दुर्गा बली, पूजन
🕐 संध्या 4:00 बजे से

शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 की पूजा विधि
- कलश स्थापना (घट स्थापना):
नवरात्रि का आरम्भ घट स्थापना से होता है। शुभ मुहूर्त में मिट्टी के बर्तन में जौ बोए जाते हैं और उस पर कलश रखा जाता है। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्के, पंचरत्न और नारियल स्थापित किए जाते हैं। - दुर्गा सप्तशती पाठ:
पूरे नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य का पाठ अनिवार्य माना जाता है। यह देवी के नौ रूपों की महिमा का वर्णन करता है। - दैनिक अर्चना:
प्रतिदिन सुबह और शाम दीपक जलाकर देवी की आरती की जाती है। साथ ही पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। - अष्टमी-नवमी विशेष पूजन:
महाअष्टमी और महानवमी के दिन विशेष हवन, संधि पूजा और कन्या पूजन किया जाता है। नौ छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है। - विजयादशमी विसर्जन:
दशमी के दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन जल में किया जाता है। इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है और इसे अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है।
विशेष कार्यक्रम और आयोजन
- फल वितरण: सप्तमी से अष्टमी तक भक्तों के बीच फल-प्रसाद का वितरण होता है।
- भजन संध्या: प्रतिदिन संध्या 7 बजे से भजन और कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।
- महाआरती और हवन: नवमी और दशमी पर विशेष हवन और महाआरती की जाती है।
- खिचड़ी प्रसाद: नवमी और दशमी को सामूहिक खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया जाता है।
- सांस्कृतिक आयोजन: कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक और दुर्गा नृत्य का आयोजन भी होता है।
शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 का धार्मिक महत्व
- शक्ति की उपासना: यह पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की उपासना के लिए समर्पित है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: नवरात्रि के दिनों में व्रत और पूजन से शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- सामाजिक समरसता: दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह सामूहिक भक्ति, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है।
शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 का यह पर्व शक्ति की उपासना और आस्था का प्रतीक है।भक्तगण इन 9 दिनों तक माँ दुर्गा की आराधना कर अपने जीवन से संकट दूर कर सकते हैं और सुख, समृद्धि तथा शांति की प्राप्ति कर सकते हैं।
शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 2025 कब से शुरू हो रही है?
यह सोमवार, 22 सितम्बर 2025 से आरम्भ होकर शुक्रवार, 03 अक्टूबर 2025 तक चलेगी।
नवरात्रि में कन्या पूजन कब किया जाता है?
कन्या पूजन प्रायः अष्टमी और नवमी के दिन किया जाता है।
विजयादशमी का धार्मिक महत्व क्या है?
विजयादशमी को माँ दुर्गा के विसर्जन का दिन माना जाता है और यह अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है।










