बॉलीवुड में मचा हड़कंप: मनोज बाजपेयी की ‘गवर्नर’ ने खोली 90 के दशक के उस काले सच की परतें, जिसे देख कांप उठेगी रूह!

बॉलीवुड में मचा हड़कंप: मनोज बाजपेयी की 'गवर्नर' ने खोली 90 के दशक के उस काले सच की परतें, जिसे देख कांप उठेगी रूह!

मनोज बाजपेयी एक बार फिर पर्दे पर आग लगाने को तैयार हैं; विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म ‘गवर्नर’ का टीज़र रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर नेटिज़न्स बोले- “बॉलीवुड को अब ऐसी ही सच्ची कहानियों की ज़रूरत है।”

Mumbai | बॉलीवुड के वर्सेटाइल एक्टर मनोज बाजपेयी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें ‘सच्ची कहानियों का सुल्तान’ क्यों कहा जाता है। विपुल अमृतलाल शाह की बहुप्रतीक्षित फिल्म गवर्नर का टीज़र आउट हो गया है और इसने इंटरनेट पर सुनामी ला दी है। यह फिल्म महज एक सिनेमा नहीं, बल्कि 1990 के दशक में भारत की उस सबसे बड़ी आर्थिक मंदी का एक दर्दनाक दस्तावेज़ है, जिसने देश की बुनियाद हिला दी थी।

महज कुछ मिनटों के इस टीज़र ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम वाकई अपने देश के उस ‘डार्क इतिहास’ से वाकिफ हैं? मनोज बाजपेयी इसमें एक आरबीआई (RBI) गवर्नर की भूमिका में हैं, और उनके चेहरे की लकीरें उस समय के तनाव को बखूबी बयां कर रही हैं।

टीज़र ने मचाया तहलका: नेटिज़न्स बोले- ‘ये है असली सिनेमा’

टीज़र रिलीज होने के कुछ ही घंटों के भीतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। लोग बॉलीवुड के इस ‘जोखिम’ लेने वाले अंदाज़ की तारीफ कर रहे हैं।

एक यूज़र ने लिखा, “बॉलीवुड को ऐसी अनकही सच्ची कहानियां और बनानी चाहिए, ‘गवर्नर’ का इंतज़ार अब मुश्किल हो रहा है।” वहीं, इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि विपुल शाह ने एक ऐसे ‘रिस्की’ सब्जेक्ट पर हाथ डाला है, जिससे अब तक बड़े-बड़े निर्माता बचते रहे हैं। लोगों का कहना है कि हर भारतीय को यह जानना चाहिए कि जब देश की तिजोरी खाली हो रही थी, तब पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा था।

क्या है ‘गवर्नर’ की कहानी? (The Backdrop)

यह फिल्म हमें 1990 के उस दौर में ले जाती है जब भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका था।

  • आर्थिक मंदी का दौर: फिल्म उस भयावह संकट को दिखाती है जब भारत को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था।
  • मनोज बाजपेयी का अवतार: नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर यहाँ एक ऐसे ऑफिसर के रूप में हैं जो सिस्टम, राजनीति और गिरती अर्थव्यवस्था के बीच अकेला खड़ा है।
  • हार्ड-हिटिंग डायलॉग्स: टीज़र में हवा में आग की महक महसूस होती है; संवाद सीधे दिल पर चोट करते हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्यों यह फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसा इम्पैक्ट पैदा कर सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गवर्नर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ‘एक्सप्लोजिव’ खुलासा साबित हो सकती है। जिस तरह से चिन्मय मंडलेकर (निर्देशक) ने मंदी के दृश्यों को बुना है, वह दर्शकों के भीतर गुस्सा और जिज्ञासा दोनों पैदा कर रहा है। जावेद अख्तर के शब्द और अमित त्रिवेदी का बैकग्राउंड स्कोर इस सस्पेंस को और गहरा बनाता है।

प्रशासन और सिस्टम का वो चेहरा जो छुपा रहा

फिल्म की स्क्रिप्ट सुवेंदु भट्टाचार्य और विपुल शाह सहित चार लेखकों ने मिलकर तैयार की है। यह इशारा करती है कि कैसे नीति निर्माताओं के एक गलत फैसले ने आम आदमी की कमर तोड़ दी थी। फिल्म में दिखाया गया ‘आरबीआई गवर्नर’ का संघर्ष यह दर्शाता है कि सत्ता के गलियारों में राष्ट्रहित और व्यक्तिगत स्वार्थ के बीच कितनी पतली लकीर होती है।

आगे क्या? फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। टीज़र ने जो माहौल बनाया है, उससे साफ है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। क्या यह फिल्म बॉलीवुड की दिशा बदल पाएगी? इसका जवाब तो रिलीज के बाद ही मिलेगा, लेकिन फिलहाल नेटिज़न्स के बीच “हवा में आग की महक” साफ़ महसूस की जा रही है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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