Ranchi | झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद इंडिया गठबंधन के भीतर एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग ने गठबंधन के मजबूत दावों की पोल खोल दी है, जिससे सहयोगी दलों के बीच खुलेआम तलवारें खिंच गई हैं।
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार या कम वोटों के गणित ने अब सहयोगियों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के गंभीर आरोपों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भाकपा-माले ने बेहद तल्ख तेवरों में पलटवार किया है, जिससे झारखंड की सियासत गरमा गई है।

क्या अंदरूनी गद्दारी से हारी कांग्रेस? के. राजू के आरोपों से भड़के सहयोगी
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू के एक बयान ने गठबंधन के भीतर बारूद का काम किया है। के. राजू ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ पार्टी के 16 विधायकों और झामुमो (JMM) का साथ मिला। उन्होंने इशारों-इशारों में राजद (RJD) और भाकपा-माले पर वोट न देने और क्रॉस वोटिंग करने का बड़ा संदेह जता दिया।
“मर जाएंगे, लेकिन भाजपा से समझौता नहीं करेंगे” – मंत्री संजय यादव का तीखा पलटवार
कांग्रेस प्रभारी के आरोपों पर राजद कोटे के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने बेहद आक्रामक अंदाज में मोर्चा संभाला। ग्राउंड जीरो पर पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री संजय यादव ने कहा:
“के. राजू पहले यह साफ करें कि खुद कांग्रेस के किस विधायक ने क्रॉस वोटिंग की है। जब वे खुद अपने विधायकों के संपर्क में थे, तो उन्हें भीतर की हकीकत क्यों नहीं दिखी? राजद के नेता मरना पसंद करेंगे, लेकिन भाजपा से समझौता कभी नहीं करेंगे।”
संजय यादव ने तकनीकी पक्ष रखते हुए साफ किया कि वोटिंग के दौरान राजद के सभी विधायकों ने अपने अधिकृत पोलिंग एजेंट भोला यादव को वोट दिखाकर ही मतपेटी में डाला था। उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “राजद कांग्रेस की तरह गद्दार नहीं है। हमें पता है कि कांग्रेस के कौन से विधायक किन-किन दलों के दरवाजे खटखटा कर आए हैं।”
[मंत्री संजय प्रसाद यादव के प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो यहाँ देखें]
भाकपा-माले का हमला: “दूसरों पर उंगली उठाने से पहले गिरेबान में झांके कांग्रेस”
विवाद यहीं नहीं थमा, वाम दल भाकपा-माले ने भी कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की संगठनात्मक विफलता बताया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट कर कांग्रेस को आईना दिखाया।
हमारे पास पुख्ता सबूत: दीपांकर भट्टाचार्य
दीपांकर भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि पार्टी के दोनों विधायकों—अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो ने तय रणनीति के तहत ही कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। वोट डालने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं हलधर महतो और गीता मंडल ने इसकी बाकायदा पुष्टि भी की थी।
छोटे दलों को बलि का बकरा बना रही कांग्रेस: अरूप चटर्जी
भाकपा-माले विधायक अरूप चटर्जी ने मैदान से लाइव प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़े दल हमेशा चालाकी से खुद साफ निकल जाते हैं और अपनी कमजोरी छिपाने के लिए छोटे दलों को बलि का बकरा बनाते हैं। वहीं, पार्टी के राज्य सचिव मनोज भक्त ने सीधा हमला बोलते हुए कहा:
“राज्यसभा चुनाव के नतीजों से साफ है कि कांग्रेस अपने ही विधायकों को संभालने में नाकाम रही है। कांग्रेस का बिकने का पुराना इतिहास रहा है। अपनी नाकामी छिपाने के लिए दूसरों पर अनर्गल प्रलाप करने के बजाय कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।”
झारखंड में अब क्या होगा?
इस क्रॉस वोटिंग विवाद ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में इंडिया गठबंधन के बीच की दरार अब खाई में बदल चुकी है।
प्रशासनिक और राजनीतिक अगला कदम: कांग्रेस आलाकमान अब अंदरूनी तौर पर अपने विधायकों की रिपोर्ट तलब कर रहा है, क्योंकि यह साफ हो चुका है कि क्रॉस वोटिंग खुद कांग्रेस के खेमे से हुई है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सहयोगियों के बीच का यह अविश्वास झारखंड की सत्ताधारी राजनीति को एक नए संकट की ओर धकेल सकता है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि झामुमो (JMM) इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की भूमिका कैसे निभाता है।
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