होली पर झारखंड में झूमकर बरसे 110 करोड़, फिर भी क्यों डरे हैं शराब कारोबारी? अब क्या होगा सरकार का कदम!

होली पर झारखंड में झूमकर बरसे 110 करोड़, फिर भी क्यों डरे हैं शराब कारोबारी? अब क्या होगा सरकार का कदम!

रांची | झारखंड में होली के हुड़दंग के बीच इस बार शराब की बोतलों ने रिकॉर्ड तो बनाया, लेकिन व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। राज्य शराब व्यापारी संघ की ताजा समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल होली पर राज्य भर में लगभग 105 से 110 करोड़ रुपये की शराब बिकी है। सभी बड़े ब्रांड्स की मौजूदगी के बावजूद, बिक्री के ये आंकड़े उम्मीद से कम रहे हैं। अब व्यापारियों ने सीधे सरकार से गुहार लगाई है कि अगर नियमों में ढील नहीं मिली, तो कई दुकानों पर ताला लटक सकता है।

10 मार्च की डेडलाइन और ‘MGR’ का खौफ: क्या डूब जाएंगे व्यापारी?

झारखंड शराब व्यापारी संघ के महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भले ही बाजार में स्टॉक की कमी नहीं थी, लेकिन उपभोक्ता व्यवहार में आए बदलाव ने खेल बिगाड़ दिया है। सबसे बड़ी चुनौती 10 मार्च की डेडलाइन है, जिसके तहत व्यापारियों को अनिवार्य रूप से स्टॉक का उठाव करना है।

व्यापारियों का कहना है कि गोदाम भरे पड़े हैं और बिक्री की रफ्तार सुस्त है। ऐसे में करोड़ों रुपये का माल डंप होने से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

क्यों मचा है हड़कंप? ये हैं 3 मुख्य कारण:

  1. MGR में 10% की भारी बढ़ोतरी: सरकार न्यूनतम प्रत्याभूत राजस्व (Minimum Guaranteed Revenue) में 10% की वृद्धि करने की तैयारी में है, जिसे व्यापारी ‘आत्मघाती’ मान रहे हैं।
  2. डेडलाइन का दबाव: 10 मार्च तक स्टॉक उठाना अनिवार्य है, जबकि पिछला माल अभी बिका ही नहीं है।
  3. अवैध शराब की घुसपैठ: वैध दुकानों की तुलना में अवैध शराब की बिक्री ने सरकारी राजस्व और व्यापारियों, दोनों को तगड़ी चोट पहुंचाई है।

क्या महंगी होगी शराब? आबकारी शुल्क पर पुनर्विचार की मांग

संघ ने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में सुझाव दिया है कि आबकारी शुल्क (Excise Duty) की संरचना को प्रतिस्पर्धी बनाया जाए। अगर टैक्स का बोझ बढ़ता है, तो ग्राहक पड़ोसी राज्यों या अवैध स्रोतों की ओर मुड़ सकता है।

“हम सरकार के राजस्व हितों के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में 10% की वृद्धि अव्यावहारिक है। हमें समय-सीमा में लचीलापन और नीति में राहत चाहिए।”

सुबोध कुमार जायसवाल, महासचिव, झारखंड शराब व्यापारी संघ

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या कहता है आम आदमी और बाजार का मूड?

रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे बड़े शहरों में शराब की दुकानों पर इस बार वो लंबी कतारें नहीं दिखीं जो पिछले वर्षों में हुआ करती थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई और लोगों के खर्च करने की क्षमता में बदलाव ने शराब बाजार को भी प्रभावित किया है।

अब क्या होगा आगे? सूत्रों के मुताबिक, आबकारी विभाग इस रिपोर्ट पर मंथन कर रहा है। यदि सरकार ने MGR में बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लिया, तो झारखंड के शराब व्यवसायी बड़े आंदोलन या लाइसेंस सरेंडर करने जैसे कड़े कदम उठा सकते हैं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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