झारखंड शराब नीति विवाद: एन.एस.सी. पर रोक से व्यापारी परेशान

झारखंड शराब नीति विवाद: एन.एस.सी. पर रोक से व्यापारी परेशान

Ranchi: झारखंड राज्य में नई शराब नीति लागू होने के बाद व्यापारी समुदाय एक बड़े असमंजस में है। विभाग के अचानक लिए गए फैसले ने न केवल व्यवसायियों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि उनके निवेश पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

एन.एस.सी. से ड्राफ्ट पर शिफ्टिंग, बढ़ी मुश्किलें

नई शराब नीति के तहत कई आवेदकों ने लाइसेंस प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) बनवाया था। उत्पाद विभाग ने पहले स्पष्ट किया था कि एन.एस.सी. मान्य होगा और इसी भरोसे व्यापारी वर्ग ने करोड़ों रुपये का निवेश किया। लेकिन अब विभाग का कहना है कि एन.एस.सी. स्वीकार नहीं होगा और इसके स्थान पर केवल ड्राफ्ट ही मान्य होगा।

इस अचानक बदलाव से व्यापारी वर्ग नाराज है। उनका कहना है कि पहले से दी गई दिशा-निर्देशों के विपरीत इस तरह नियम बदलना अनुचित है।

व्यापारी संघ का विरोध और मांग

झारखंड शराब व्यापारी संघ ने इस निर्णय का कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ के महासचिव सुबोध कुमार जयसवाल ने कहा कि विभाग के पुराने आदेशों के अनुरूप एन.एस.सी. को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यवसायियों ने विभाग की शर्तों के आधार पर ही निवेश किया था, इसलिए अचानक नए नियम लागू करना उनके साथ अन्याय है।

संघ ने विभाग से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, पहले से निवेश किए गए एन.एस.सी. को मान्य किया जाए। दूसरी, यदि किसी तकनीकी कारण से ड्राफ्ट अनिवार्य है, तो आवेदकों को पर्याप्त समय और अन्य विकल्प दिए जाएँ। तीसरी, व्यवसायियों को भ्रमित करने वाली स्थिति खत्म की जाए और स्पष्ट दिशा-निर्देश तुरंत जारी किए जाएँ।

निवेश पर संकट, व्यापारियों में असंतोष

व्यापारियों का कहना है कि एन.एस.सी. बनवाने में न केवल समय और मेहनत लगी है बल्कि बड़ी रकम भी फंस गई है। अब यदि ड्राफ्ट अनिवार्य हो जाता है तो उन्हें दोबारा उतनी ही राशि का इंतजाम करना पड़ेगा। यह उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल देगा और उनके व्यापारिक योजनाओं को बाधित करेगा।

व्यापारी वर्ग ने यह भी आरोप लगाया है कि विभाग की नीतियों में पारदर्शिता का अभाव है। लगातार बदलते नियमों से उनके लिए व्यापार करना और कठिन होता जा रहा है।

सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल

इस पूरे विवाद पर अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। व्यापारी संघ का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

झारखंड में शराब नीति पहले से ही विवादों में घिरी रही है। ऐसे में नया आदेश विभाग और व्यापारी वर्ग के बीच टकराव को और गहरा कर सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और व्यापारियों की मांगों पर कितना ध्यान देती है।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment