राँची | झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत और प्रशासनिक हलचल चरम पर है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर एक बड़ी मांग उठाई है, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
जेएमएम के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर मांग की है कि जिन मतदाताओं के नामों में गड़बड़ी (Anomaly) है या जो Unmapped श्रेणी में हैं, उनसे घर-घर जाकर की जाने वाली गणना (Enumeration) के दौरान ही दस्तावेज ले लिए जाएं। जेएमएम का तर्क है कि बाद में नोटिस भेजने से ग्रामीण इलाकों और गरीब तबके में नाम कटने का डर और अफवाहें फैल सकती हैं।
चुनाव आयोग का दो टूक जवाब: “वोटर को नहीं देना है कोई दस्तावेज”
झारखंड मुक्ति मोर्चा की इस चिंता और मांग पर राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है कि मैपिंग और गृह-गणना (Enumeration Phase) के दौरान किसी भी सामान्य मतदाता को कोई भी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि गणना चरण के दौरान मतदाताओं को सिर्फ आधा भरा हुआ गणना प्रपत्र (Enumeration Form) चेक करके उस पर हस्ताक्षर करना होगा और एक रंगीन फोटो देनी होगी। आयोग ने साफ किया कि ‘एसआईआर-2026‘ की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है और दस्तावेज केवल उन्हीं बेहद कम चिन्हित मतदाताओं से मांगे जाएंगे, जिन्हें 5 अगस्त से 5 अक्टूबर 2026 के बीच स्क्रूटनी के बाद नोटिस जारी किया जाएगा।
जेएमएम की दलील: नोटिस राज से बढ़ेगी प्रवासियों और प्रशासन की आफत
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। जेएमएम ने अपने पत्र में 5 मुख्य बिंदु उठाए हैं:
- भ्रम और डर का माहौल: ग्रामीण और कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में बाद में नोटिस मिलने पर लोगों को लगेगा कि उनका नाम काटा जा रहा है।
- प्रवासी श्रमिकों पर बोझ: झारखंड के लाखों युवा और श्रमिक राज्य से बाहर रोजगार और पढ़ाई कर रहे हैं। नोटिस मिलने पर उन्हें बार-बार झारखंड दौड़ना पड़ेगा, जिससे उनका आर्थिक नुकसान होगा।
- बीएलओ (BLO) पर दबाव: बाद में व्यक्तिगत सुनवाई और भारी दस्तावेजों के मिलान से जिला प्रशासन और बूथ स्तरीय अधिकारियों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा।
“हम मतदाता सूची की शुद्धता का सम्मान करते हैं, लेकिन अनमैपिड (Unmapped) मतदाताओं से शुरुआत में ही कागज ले लेना ज्यादा व्यावहारिक और मानवीय होगा।”
— विनोद कुमार पांडेय, महासचिव, जेएमएम
चुनाव आयोग का थ्री-स्टेप फॉर्मूला: तीन स्थितियों में समझें अपना हक
अखबारों और प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग ने मतदाताओं की तीन श्रेणियां तय की हैं ताकि कोई भ्रम न रहे:
| मतदाता की स्थिति | गणना चरण में क्या करना होगा? | दस्तावेज की जरूरत? |
| 1. बिना त्रुटि वाली मैपिंग | केवल हस्ताक्षरित फॉर्म और एक रंगीन फोटो दें। | बिल्कुल नहीं |
| 2. मैपिंग हुई, पर विवरण में त्रुटि है | बीएलओ और ईआरओ (ERO) खुद वेबसाइट से सही डेटा खोजकर सुधार करेंगे। | बिल्कुल नहीं |
| 3. जिन्होंने अभी तक मैपिंग नहीं की | अधिकारी खुद मतदाता या उसके माता-पिता का रिकॉर्ड 2003 की वोटर लिस्ट से खोजेंगे। | बिल्कुल नहीं |
झारखंड चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने की यह कवायद अब प्रशासनिक कम और राजनीतिक ज्यादा होती दिख रही है। जहाँ जेएमएम सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हुए शुरुआती चरण में ही कागजी औपचारिकताएं पूरी कराना चाहती है, वहीं चुनाव आयोग तकनीकी और डिजिटल टूल्स (जैसे voters.eci.gov.in) के भरोसे प्रक्रिया को कम से कम बोझिल बनाना चाहता है। अब देखना यह होगा कि क्या आयोग जेएमएम के इस अनुवर्ती पत्र के बाद ग्रामीण इलाकों के लिए कोई नई गाइडलाइन जारी करता है या नहीं, लेकिन फिलहाल आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि किसी का नाम बिना ठोस सत्यापन के नहीं कटेगा।
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