Giridih | गिरिडीह में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने चुनावी बिसात पर अपनी सबसे बड़ी चिंता को लेकर मोर्चा खोल दिया है। रविवार को गिरिडीह के उत्सव उपवन सभागार में आयोजित बीएलए टू (BLA-2) के एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सह बूथ सम्मेलन में पार्टी के शीर्ष दिग्गजों ने साफ़ कर दिया कि आगामी चुनावों से पहले संगठन किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस महामंथन का मुख्य केंद्र बिंदु रहा ‘एसआईआर’ (SIR यानी स्पेशल इंक्वायरी रिपोर्ट / मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया)। झामुमो को डर है कि इस प्रक्रिया के दौरान कहीं उसके पारंपरिक और वैध वोट काट न दिए जाएं। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने अपने बूथ लेवल एजेंटों को मैदान में मुस्तैद रहने का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है।
शुरुआती राजनीतिक हलचल को देखते हुए यह साफ है कि झामुमो इस बार कागजी तैयारियों में विपक्षी दलों से पीछे नहीं रहना चाहती। पार्टी के केंद्रीय महासचिव से लेकर जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं तक, हर कोई इस समय सिर्फ एक ही मिशन पर जुटा है—बूथ जीतो, चुनाव जीतो।
गांडेय विधायक कल्पना सोरेन की चेतावनी: “महिलाओं के वोट पर रखें खास नजर”
प्रशिक्षण शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंची गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने इस अभियान में महिलाओं की भूमिका और उनके दस्तावेजों को लेकर सबसे बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में महिलाओं के नाम पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
“महिलाओं को बहू के रूप में दूसरे घर से आना होता है और बेटी के रूप में शादी के बाद बाहर जाना होता है। इस फेरबदल में अक्सर उनके नाम मतदाता सूची से गायब हो जाते हैं या तकनीकी गड़बड़ी हो जाती है। बूथ कमेटी आज से ही हर महिला का जरूरी दस्तावेज तैयार करवाना शुरू करे।”
— कल्पना मुर्मू सोरेन, विधायक, गांडेय

कल्पना सोरेन ने कार्यकर्ताओं को दोटूक शब्दों में हिदायत दी कि किसी भी हाल में किसी वैध मतदाता का नाम कटना नहीं चाहिए और एक भी फर्जी वोट सूची में जुड़ना नहीं चाहिए। इसके लिए उन्होंने बूथ लेवल पर माइक्रो-मैनेजमेंट करने की सलाह दी।
“पात्र छूटे नहीं, अपात्र जुड़े नहीं” — विनोद पांडेय ने समझाया झामुमो का ‘मिशन एसआईआर’
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने इस मौके पर पार्टी की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने साफ कहा कि ‘एसआईआर’ को लेकर झामुमो बेहद गंभीर है और इस पूरी प्रक्रिया पर बूथ कमेटी से लेकर केंद्रीय कमेटी तक के पदाधिकारियों की पैनी नजर है।
मंत्रियों और सांसदों ने कार्यकर्ताओं को दी ये नसीहतें:
- नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार: “एक भी वैध वोट सूची से कटना नहीं चाहिए। यह सीधे तौर पर हमारे बीएलए टू और बूथ कमेटी की जिम्मेदारी है। एसआईआर रूपी इस सांगठनिक जंग को भी झामुमो हर हाल में जीतेगी।”
- राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद: “एसआईआर को लेकर सभी स्तरों पर सतर्कता जरूरी है। यदि जमीनी स्तर पर कोई भी तकनीकी दिक्कत या प्रशासनिक लापरवाही दिखे, तो तुरंत पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से संपर्क साधें।”
- पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी (धनवार): “एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अल्पसंख्यकों के दस्तावेजों और उनके नामों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रह जाए।”
रांची की स्पेशल टीम ने दी ट्रेनिंग
इस सम्मेलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यकर्ताओं और बीएलए-2 को ट्रेनिंग देने के लिए विशेष रूप से रांची से एक एक्सपर्ट टीम गिरिडीह पहुंची थी। इस टीम ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े पेचीदा नियमों को बेहद सरल तरीके से समझाया।
[रांची से आई टीम द्वारा बीएलए-2 को दी जा रही ट्रेनिंग का विजुअल यहाँ लगाएं]

सम्मेलन के दौरान सभी छह विधानसभा क्षेत्रों के प्रखंडों से आए बीएलए टू और बूथ कमेटी के पदाधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज और गाइडलाइंस की किट सौंपी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने की, जबकि शुरुआत नेताओं द्वारा शहीद बेदी पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस मौके पर पूर्व विधायक केदार हाजरा, अखिलेश महतो राजू, प्रणव वर्मा समेत सैकड़ों की संख्या में पंचायत और बूथ स्तर के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
क्या झामुमो का यह दांव विपक्ष पर पड़ेगा भारी?
झामुमो का एसआईआर को लेकर यह आक्रामक रुख साफ संकेत देता है कि पार्टी इस बार मतदाता सूची में होने वाली किसी भी संभावित गड़बड़ी को लेकर पहले से ही ‘अलर्ट मोड’ पर है। प्रशासन का अगला कदम अब इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करना होगा। वहीं, झामुमो की इस चौतरफा घेराबंदी के बाद अब देखना यह होगा कि विपक्षी खेमा बूथ स्तर पर इस काउंटर-रणनीति का जवाब कैसे देता है। फिलहाल, गिरिडीह की इस हलचल ने झारखंड की राजनीतिक तपिश को और बढ़ा दिया है।
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