नई दिल्ली/पटना: लोकतंत्र और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर बहस के बीच आज दो अहम घटनाओं पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। एक तरफ, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राजधानी दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिहार से अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत कर रहे हैं। दोनों घटनाएं आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गर्मा रही हैं।
चुनाव आयोग का एजेंडा और विवाद
निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, रायसीना रोड पर दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया है। हालांकि, अभी तक इसका आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्यक्रम बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान और विपक्ष के ‘वोट चोरी’ आरोपों पर प्रतिक्रिया से जुड़ा हो सकता है।
राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने दावा किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बिहार में 65.6 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उनका आरोप है कि यह कदम बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया गया। वहीं, आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पारदर्शी तरीके से चल रही है।
राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’
बिहार के औरंगाबाद से राहुल गांधी ने आज ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की। इस यात्रा का उद्देश्य मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और SIR प्रक्रिया का विरोध करना है। राहुल गांधी ने सभा को संबोधित करने के बाद देव सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना की।
यात्रा के अगले चरण में वे अंबा चौक और बोधगया पहुंचेंगे। इस दौरान इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल उनके साथ शामिल होंगे। कांग्रेस और राजद नेताओं ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम बहुल इलाकों से जानबूझकर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया है।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “वोट चोरी लोकतंत्र की नींव पर हमला है”। उन्होंने मांग की कि आयोग डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करे ताकि जनता और राजनीतिक दल उसका ऑडिट कर सकें। इसके लिए उन्होंने वेबसाइट votechori.in और एक मिस्ड कॉल नंबर भी लॉन्च किया है।
बीजेपी और जेडीयू ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि यदि राहुल को आयोग पर भरोसा नहीं है, तो उन्हें संसद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का सवाल बताया है।
आगे की राह
आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस और राहुल गांधी की यात्रा दोनों पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। आयोग की प्रतिक्रिया और राहुल के बयानों से बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आयोग को मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद 1 अगस्त को पहला ड्राफ्ट लिस्ट जारी किया गया था।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव से पहले मतदाता सूची विवाद और यह सियासी घमासान किस दिशा में जाता है। लेकिन इतना तय है कि बिहार का चुनावी रण इस बार और ज्यादा रोचक और विवादित होता दिख रहा है।











