Ranchi: चिकित्सा जगत में झारखंड के नाम एक ऐसी उपलब्धि जुड़ी है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है। रांची के जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ डॉ. बिभूति कश्यप ने एक नहीं, बल्कि दो ‘रेट बकलर’ (Rat Buckler) ट्रॉफियां जीतकर रेटिना सर्जरी में विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। इसे चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में रेटिना सर्जरी का ‘ऑस्कर’ माना जाता है। अब इस ऐतिहासिक गौरव के लिए ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी आज रांची में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित करने जा रही है।
क्यों खास है यह सम्मान और कैसे बना विश्व रिकॉर्ड?
दरअसल, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ रेटिना स्पेशलिस्ट (ASRS) के सम्मेलन में दुनिया भर के दिग्गज सर्जन्स के बीच डॉ. बिभूति कश्यप की जटिल सर्जरी तकनीकों को सर्वश्रेष्ठ माना गया। एक ही सत्र में दो प्रतिष्ठित ट्रॉफियां जीतना न केवल दुर्लभ है, बल्कि यह ग्लोबल मेडिकल कम्युनिटी में एक ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ के तौर पर देखा जा रहा है। यह सम्मान बताता है कि अब झारखंड की राजधानी रांची में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की नेत्र चिकित्सा उपलब्ध है।
आज स्वर्णभूमि में जुटेगा देश भर के दिग्गजों का जमावड़ा
झारखंड ऑप्थल्मोलॉजी सोसाइटी (JHOS) के 23वें वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन, यानी आज 14 फरवरी को पुरुलिया रोड स्थित ‘स्वर्णभूमि’ में एक भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित है। इस कार्यक्रम में देश के शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. बिभूति कश्यप की इस जादुई उपलब्धि का जश्न मनाएंगे।
इन दिग्गजों के हाथों होगा सम्मान
- डॉ. पार्था विश्वास: अध्यक्ष, ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी
- डॉ. मोहन राजन: उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी
ये दोनों दिग्गज हस्तियां डॉ. कश्यप को उनकी वैश्विक उपलब्धि के लिए ‘स्पेशल ऑनर’ से नवाजेंगी। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस सम्मान समारोह को लेकर झारखंड के डॉक्टरों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों में भारी उत्साह है।
रांची से न्यूयॉर्क तक का सफर और तकनीक की जीत
डॉ. बिभूति कश्यप की इस जीत के पीछे वर्षों की मेहनत और जटिल रेटिना केसेज को सुलझाने का जज्बा है। रेटिना सर्जरी को आंखों की सबसे संवेदनशील और कठिन सर्जरी माना जाता है।
डॉक्टरों का मानना है कि:
”दो ‘ऑस्कर’ (रेट बकलर ट्रॉफियां) मिलना यह साबित करता है कि भारतीय सर्जन्स की तकनीक और हाथ की सफाई अब पश्चिमी देशों से कहीं आगे निकल चुकी है। यह झारखंड के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े महानगरों या विदेश भागने की जरूरत नहीं है।”
आम आदमी और मरीजों पर क्या होगा इसका असर?
जब कोई स्थानीय डॉक्टर वैश्विक मंच पर सर्वोच्च सम्मान पाता है, तो उसका सीधा लाभ मरीजों को मिलता है:
- भरोसे की जीत: मरीजों को अब अपने शहर के डॉक्टरों की काबिलियत पर अटूट विश्वास होगा।
- हाई-टेक इलाज: डॉ. कश्यप की इस तकनीक का इस्तेमाल अब झारखंड के गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों के जटिल ऑपरेशन में हो सकेगा।
- मेडिकल टूरिज्म: इस उपलब्धि के बाद रांची पूरे पूर्वी भारत में आई-केयर (Eye Care) का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
आगे क्या?
झारखंड ऑप्थल्मोलॉजी सोसाइटी का यह 23वां सम्मेलन केवल सम्मान तक सीमित नहीं है। यहां होने वाली चर्चाएं और तकनीक का आदान-प्रदान आने वाले समय में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई दिशा देगा। डॉ. बिभूति की यह जीत युवाओं के लिए एक मिसाल है कि संसाधन सीमित होने के बावजूद वैश्विक स्तर पर झंडा गाड़ा जा सकता है।









