Ranchi: झारखंड की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। पंचम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत मिलने वाली भारी-भरकम राशि अब सीधे पंचायतों के बैंक खातों में पहुंचने वाली है। लेकिन, इस पैसे को पाने के लिए सरकार ने बेहद सख्त समय सीमा तय कर दी है।
पंचायती राज विभाग ने राज्य के सभी उपायुक्तों और जिला परिषद के पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 26 फरवरी 2026 तक हर हाल में बैंक खातों की मैपिंग और ‘Pay ID’ जेनरेट करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। अगर इस समय सीमा के भीतर डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए आवंटित होने वाली राशि अधर में लटक सकती है।
क्यों मचा है पंचायती राज विभाग में हड़कंप?
झारखंड सरकार के अवर सचिव सुरेश कुमार दास द्वारा जारी पत्र (संख्या 550) ने पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल मचा दी है। दरअसल, विभाग ने पहले भी 7 नवंबर 2025 को पत्र लिखकर खाता खोलने और मैपिंग करने का निर्देश दिया था, लेकिन कई जिलों से अब तक कोई ठोस सूचना नहीं मिली है।
सरकार की मंशा साफ है: बिचौलियों और देरी के सिस्टम को खत्म कर CFMS (Comprehensive Financial Management System) के माध्यम से सीधे Electronic Fund Transfer करना। इसके लिए पंचायतों के बैंक खातों का न केवल सक्रिय होना जरूरी है, बल्कि उन्हें CFMS पोर्टल पर मैप करके ‘Pay ID’ जेनरेट करना भी अनिवार्य है।
इन अधिकारियों को मिली सीधी जिम्मेदारी
सरकार ने इस मिशन को समय पर पूरा करने के लिए जिले के शीर्ष अधिकारियों को जवाबदेह बनाया है:
- सभी उपायुक्त (DC): जिले में पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए।
- उप विकास आयुक्त (DDC) सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी: जिला परिषद स्तर पर क्रियान्वयन के लिए।
- जिला पंचायत राज पदाधिकारी (DPRO): जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायतों का डेटा संकलित करने के लिए।
26 फरवरी की डेडलाइन: क्या-क्या जमा करना होगा?
विभाग ने एक विशेष ‘विहित प्रपत्र’ (Format) जारी किया है, जिसे भरकर 26 फरवरी 2026 तक मुख्यालय भेजना अनिवार्य है। इसमें केवल खाता संख्या देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि निम्नलिखित जानकारियां भी देनी होंगी:
- जिला, प्रखण्ड और ग्राम पंचायत का नाम।
- बैंक पासबुक के अनुसार खाताधारक का सटीक नाम।
- बैंक का नाम, शाखा और IFSC कोड।
- सबसे महत्वपूर्ण: बैंक पासबुक की छायाप्रति और पोर्टल से जेनरेटेड Pay ID।
विहित प्रपत्र (Data Format) में भरने वाली जानकारी
| कॉलम संख्या | विवरण |
| 1 – 4 | जिला, प्रखण्ड, ग्राम पंचायत का नाम |
| 5 | खाताधारक का नाम (बैंक पासबुक के अनुसार) |
| 6 – 8 | बैंक का नाम, शाखा और IFSC कोड |
| 9 – 10 | खाता संख्या और Pay ID |
आम जनता और विकास कार्यों पर क्या होगा असर?
यह राशि सीधे तौर पर ग्रामीण विकास से जुड़ी है। अगर बैंक खातों की मैपिंग में देरी होती है, तो गांवों में होने वाले सड़क, नाली, पेयजल और अन्य सामुदायिक विकास के काम रुक सकते हैं। पंचम राज्य वित्त आयोग की यह राशि पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए भेजी जा रही है, ताकि वे अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार खर्च कर सकें।
आगे क्या? सिस्टम में बदलाव की तैयारी
सरकार अब ‘Manual’ पेमेंट के बजाय पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम की ओर बढ़ रही है। 26 फरवरी के बाद विभाग उन पंचायतों की सूची तैयार करेगा जिन्होंने डेटा जमा नहीं किया है। संभावना जताई जा रही है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिर सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर विकास निधि के हस्तांतरण से जुड़ा मामला है।









