Ranchi | अगर आप भी पेट में लगातार गैस बनने, एसिडिटी या पेट दर्द को ‘मामूली हाजमे की खराबी’ समझकर दबा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आपकी यह अनदेखी किसी बड़ी और जानलेवा बीमारी का रूप ले सकती है।
यशोदा अस्पताल के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जगदीश पोलावरापु ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ गैस नहीं, बल्कि लिवर, आंत, अग्न्याशय (Pancreas) या पित्ताशय की गंभीर बीमारी का शुरुआती अलार्म हो सकता है।
रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि समय रहते जांच न कराना जिंदगी पर भारी पड़ सकता है।
मल में खून आना सिर्फ बवासीर नहीं, कैंसर का भी खतरा!
डॉ. जगदीश ने बताया कि कई लोग शौच के दौरान खून आने को सीधे तौर पर पाइल्स (बवासीर) मानकर घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं।
“उल्टी या मल में खून आना एक बेहद गंभीर चेतावनी है। इसे सामान्य बवासीर समझने की भूल न करें, क्योंकि कई मामलों में यह आंत के कैंसर (Intestinal Cancer) का भी संकेत होता है।”
— डॉ. जगदीश पोलावरापु, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट
यदि आपको लगातार भूख न लगना, अचानक वजन गिरना या लंबे समय से कब्ज की शिकायत है, तो बिना देरी किए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच करवाएं।
अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर दिखे तो हल्के में न लें
आजकल खान-पान और बिगड़ी लाइफस्टाइल के कारण अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में ‘फैटी लिवर’ (Fatty Liver) आना बेहद आम हो चुका है। विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट किलर’ की तरह देखते हैं।
- तुरंत कराएं जांच: फैटी लिवर डिटेक्ट होते ही लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और जरूरी क्लीनिकल जांच कराएं।
- समय पर इलाज: शुरुआती स्तर पर फैटी लिवर को रिवर्स किया जा सकता है, लापरवाही बरतने पर यह लिवर सिरोसिस जैसी स्थिति में बदल सकता है।
बढ़ता मोटापा सिर्फ दिखावे की नहीं, जिंदगी की जंग
झारखंड समेत पूरे देश में मोटापे की समस्या तेजी से विकराल रूप ले रही है। डॉक्टरों के अनुसार मोटापा केवल सुंदरता या वजन का मसला नहीं है, बल्कि यह बीमारियों का प्रवेश द्वार है।
मोटापे के कारण शरीर में कई गंभीर खतरे पैदा होते हैं:
- हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज
- कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन और दिल का दौरा
- लिवर फेलियर का बढ़ा हुआ जोखिम
रांची में ही उपलब्ध है परामर्श, बड़े शहरों की दौड़ जरूरी नहीं
राहत की बात यह है कि प्राथमिक और सामान्य गैस्ट्रो जांच के लिए अब मरीजों को बड़े महानगरों में भटकने की जरूरत नहीं है। स्थानीय स्तर पर जांच की पूरी सुविधाएं मौजूद हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि जटिल लिवर ट्रांसप्लांट या गंभीर अग्न्याशय रोगों के लिए ही बाहर जाने की नौबत आती है। इसी कड़ी में यशोदा अस्पताल की विशेषज्ञ टीम अब हर महीने के चौथे बुधवार को रांची में ही मरीजों को सुपर-स्पेशियलिटी परामर्श देगी।
मोटापा और पेट की बीमारियों से बचने के लिए तुरंत अपनी जीवनशैली बदलें। संतुलित आहार लें, रोजाना 30-40 मिनट व्यायाम करें और धूम्रपान से दूरी बनाएं। गंभीर मोटापे के मामलों में एंडोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रोप्लास्टी जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन अनुशासन ही सबसे बड़ा इलाज है।











