Ranchi। झारखंड की राजधानी राँची की सड़कों पर आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर परिवहन विभाग की टीमों ने एक साथ कई इलाकों में घेराबंदी कर दी। तुपुदाना से लेकर रिंग रोड और कांके तक चले इस सघन चेकिंग अभियान ने नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों की नींद उड़ा दी है। महज कुछ घंटों की कार्रवाई में प्रशासन ने 3.61 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूल कर साफ संदेश दे दिया है कि अब लापरवाही महंगी पड़ेगी।
अगर आप भी राँची की सड़कों पर बिना हेलमेट, एक्सपायर्ड इंश्योरेंस या ओवरलोडेड गाड़ी लेकर निकल रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। जिला प्रशासन का यह ‘हंटर’ अब थमने वाला नहीं है। आज की इस बड़ी कार्रवाई में 176 वाहनों की सघन जांच की गई, जिसमें फिटनेस से लेकर प्रदूषण प्रमाण पत्र तक की बारीकी से पड़ताल की गई।
इन इलाकों में रही सबसे ज्यादा सख्ती, फंस गए 15 वाहन
जिला परिवहन पदाधिकारी के नेतृत्व में प्रशासन की टीमों ने राँची के एंट्री और एक्जिट पॉइंट्स को पूरी तरह कवर किया। मुख्य रूप से तुपुदाना, दलादली, रातु, रिंग रोड और कांके जैसे व्यस्त इलाकों में बैरिकेडिंग लगाकर जांच की गई।
जांच के दौरान पाया गया कि कई व्यावसायिक और निजी वाहन बिना वैध दस्तावेजों के धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे थे। प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 15 वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया, जबकि 2 गाड़ियों को मौके पर ही जब्त कर रातु और कांके थाने के हवाले कर दिया गया।
चेकलिस्ट: आखिर क्या देख रही है प्रशासन की टीम?
ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों की नजर सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के हर पहलू पर है। जांच टीम मुख्य रूप से इन 8 बिंदुओं पर फोकस कर रही है:
- रोड टैक्स: क्या आपने समय पर टैक्स भरा है?
- फिटनेस: क्या गाड़ी सड़क पर चलने लायक सुरक्षित है?
- बीमा (Insurance): एक्सपायर्ड पॉलिसी पर सीधे चालान।
- प्रदूषण (PUC): जहरीला धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों पर सख्ती।
- परमिट: क्या व्यावसायिक वाहनों के पास रूट परमिट है?
- लाइसेंस: बिना ड्राइविंग लाइसेंस गाड़ी चलाने वालों पर नो-टोलरेंस।
- ओवरलोडिंग: ट्रकों और टिप्परों की विशेष जांच।
- हेल्मेट और सीट बेल्ट: सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर तत्काल कार्रवाई।
आम आदमी पर असर: आखिर क्यों जरूरी है यह सख्ती?
राँची में पिछले कुछ महीनों में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में बढ़ोतरी देखी गई है। रिंग रोड जैसे इलाकों में तेज रफ्तार और ओवरलोडेड ट्रक अक्सर काल बनते हैं। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सिर्फ जुर्माना वसूलने के लिए नहीं, बल्कि ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को पाने के लिए है।
“सड़कें सबकी साझा संपत्ति हैं और सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी। हमारा लक्ष्य राँची को सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त बनाना है। जो नियमों को ताक पर रखेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।” — मंजूनाथ भजन्त्री, उपायुक्त, राँची
आगे क्या? प्रशासन की अगली रणनीति
सूत्रों की मानें तो यह तो बस शुरुआत है। आने वाले दिनों में यह अभियान राँची के शहरी इलाकों के साथ-साथ ब्लॉक स्तर तक फैलेगा। प्रशासन अब डिजिटल चालान और सीसीटीवी सर्विलांस को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी में है, ताकि कोई भी नियम तोड़ने वाला बच न सके।











