रांची के जगन्नाथपुर मंदिर में गार्ड की हत्या, CCTV में रिकॉर्ड हुआ पूरा वारदात

रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में खून से सना फर्श: गार्ड की बेरहमी से हत्या के बाद क्या अब आस्था के केंद्र भी सुरक्षित नहीं?

रांची। झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को भी चोट पहुंचाई है। धुर्वा स्थित 335 साल पुराने ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के परिसर में बीती रात अज्ञात अपराधियों ने सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी। शुक्रवार सुबह जब मंदिर के पट खुले, तो भक्ति के माहौल की जगह वहां बिछी लाश और खून के धब्बे देखकर हर कोई सन्न रह गया।

आखिर भारी सुरक्षा वाले इस ऊंचे टीले पर स्थित मंदिर में अपराधी दाखिल कैसे हुए? क्या यह सिर्फ एक हत्या है या इसके पीछे मंदिर की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोई बड़ी साजिश? पुलिस अब इन तमाम पहलुओं की तफ्तीश में जुटी है।

खून से लथपथ मिला शव: सुबह जब मंदिर पहुंचे पुजारी तो उड़े होश

रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह जब मंदिर के पुजारी और कर्मचारी परिसर में दाखिल हुए, तो उनकी नजर गार्ड बिरसा मुंडा के बेजान शरीर पर पड़ी। बिरसा लंबे समय से मंदिर की सुरक्षा में तैनात थे और स्थानीय स्तर पर काफी भरोसेमंद माने जाते थे। हत्या इतनी बेरहमी से की गई थी कि फर्श पर चारों तरफ खून फैला हुआ था। घटना की खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते हजारों की संख्या में आक्रोशित श्रद्धालु मंदिर के नीचे जमा हो गए।

खून से लथपथ मिला शव: सुबह जब मंदिर पहुंचे पुजारी तो उड़े होश

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ नीलांचल पहाड़ी क्षेत्र

वारदात की गंभीरता को देखते हुए रांची के एसएसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा और ग्रामीण एसपी समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। धुर्वा, विधानसभा और जगन्नाथपुर थाना की पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है।

  • FSL की टीम: फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने मौके से फिंगरप्रिंट्स और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं।
  • CCTV जांच: मंदिर परिसर और पहाड़ी की ओर आने वाले सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
  • डॉग स्क्वायड: संदिग्धों के भागने के रूट का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है।

आपसी रंजिश या डकैती की कोशिश? पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

रांची पुलिस फिलहाल दो मुख्य थ्योरी पर काम कर रही है। पहली— क्या यह आपसी रंजिश का मामला है? चूंकि बिरसा मुंडा लंबे समय से यहां थे, तो क्या उनकी किसी से दुश्मनी थी? दूसरी और सबसे चिंताजनक थ्योरी— चोरी या डकैती की मंशा। जगन्नाथपुर मंदिर में बेशकीमती विग्रह और दान-पुण्य की संपत्ति रहती है, क्या अपराधी मंदिर में सेंध लगाने आए थे और गार्ड के विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी?

ग्राउंड रिपोर्ट: स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय पहाड़ी के पिछले हिस्से में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। पुलिस गश्त की कमी का फायदा उठाकर अपराधियों ने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है।

335 साल का इतिहास और सुरक्षा पर दाग

1691 में बड़कागढ़ रियासत के राजा एनीनाथ शाहदेव द्वारा निर्मित यह मंदिर केवल पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति का प्रतीक है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बने इस मंदिर में होने वाली रथ यात्रा में लाखों की भीड़ उमड़ती है। ऐसे पवित्र स्थान पर रक्षक की ही हत्या हो जाना प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाई टेंशन: बता दें कि रांची में पिछले कुछ दिनों में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। अभी 21 अप्रैल को ही पंडरा में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह की सरेआम हत्या कर दी गई थी। शहर में बढ़ती इन वारदातों ने आम जनता के मन में डर पैदा कर दिया है।

प्रशासन के सामने उठते कड़े सवाल

इस घटना के बाद अब मंदिर की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से ऑडिट की मांग उठ रही है। भक्तों का कहना है कि अगर मुख्य मंदिर के परिसर में गार्ड सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करे? फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस ने दावा किया है कि जल्द ही हत्यारे सलाखों के पीछे होंगे।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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