Ranchi | झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS – राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में एक बेहद चौंकाने वाला और अनोखा ‘वाहन बिल घोटाला’ सामने आया है। रिम्स प्रबंधन ने चारपहिया वाहनों, बसों और मिनी ट्रकों के इस्तेमाल के नाम पर एक टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया। लेकिन जब इन वाहनों के नंबरों की ऑनलाइन जांच की गई, तो वो नंबर मोटरसाइकिल और स्कूटर के निकले!
इस पूरे महाफर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा ‘प्रभात खबर’ ने प्रमुखता से किया है। ‘प्रभात खबर’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) झारखंड की ऑडिट टीम ने इस गड़बड़ी को पकड़ा है और इसे रिम्स की आंतरिक वित्तीय नियमों और नियंत्रण व्यवस्था के विपरीत माना है। शुरुआती 100 शब्दों में रिम्स में बिल घोटाला का यह पर्दाफाश साफ करता है कि अस्पताल प्रशासन के नाक के नीचे सरकारी फंड की जमकर बंदरबांट की गई है।
मेसर्स रवींद्र टूर एंड ट्रेवल्स को किया गया 9.10 लाख का भुगतान
‘प्रभात खबर’ द्वारा उजागर किए गए रिपोर्ट के मुताबिक, महालेखाकार की टीम ने अक्टूबर 2024, मार्च 2025, जून 2025 और मार्च 2026 के बिलों की गहराई से जांच की थी। इस जांच में पाया गया कि मोराबादी के दीपाटोली स्थित ‘मेसर्स रवींद्र टूर एंड ट्रेवल्स कॉम्बिनेशन’ नामक एजेंसी को कुल 9.10 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन बिलों के आधार पर यह भुगतान किया गया, उनमें दर्ज गाड़ी नंबरों का मिलान जब झारखंड सरकार के ऑनलाइन पोर्टल ‘एम परिवहन’ से किया गया, तो पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई। पोर्टल पर जो नंबर स्कूटर और मोटरसाइकिल के रूप में रजिस्टर्ड हैं, उन्हें रिम्स के बिलों में इनोवा, कार, बस और मिनी ट्रक के रूप में दर्शाया गया था।
बिना आरसी और फिटनेस के ही पास हो गए लाखों के बिल
ऑडिट रिपोर्ट में इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया गया है कि रिम्स के लेखा परीक्षा कार्यालय द्वारा इन वाहनों की आरसी (RC), बीमा, फिटनेस और परमिट आदि का कोई भौतिक या ऑनलाइन सत्यापन नहीं किया गया। रिकॉर्ड में हेरफेर कर बिना किसी पुख्ता दस्तावेज और संदिग्ध विवरण के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया को फटाफट पूरा कर दिया गया।
इतना ही नहीं, इन वाहनों का इस्तेमाल रिम्स निदेशक कार्यालय और चेयरपर्सन के नाम पर दिखाया गया था। बता दें कि रिम्स शासी परिषद के चेयरपर्सन खुद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री होते हैं। ऐसे में वीआईपी नामों का सहारा लेकर अधिकारियों ने बिना किसी डर के इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।
रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार बोले—”दोषियों पर दर्ज होगी एफआईआर”
महालेखाकार की टीम द्वारा रिम्स प्रशासन को लिखित रूप से यह रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप है। इस बड़े खुलासे के बाद रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार से सीधी बात की, तो उन्होंने कड़ा रुख अपनाने का दावा किया:
सवाल: क्या ऑडिट में वाहन बिल भुगतान में गड़बड़ी पकड़ी गई है?
निदेशक: जी हां, महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में इस गड़बड़ी की लिखित जानकारी दी है। बिल में दर्ज गाड़ी नंबर कार या बस का है, जबकि ऑनलाइन वह बाइक और स्कूटर का नंबर है। चूंकि निदेशक का अपना वाहन होता है, इसलिए ये वाहन किस कार्य के लिए मंगाए गए थे, इसकी गहन जांच कराई जाएगी।
सवाल: आपके स्तर पर अब क्या कार्रवाई की जा रही है?
निदेशक: एक विशेष जांच टीम गठित की जा रही है। इस खेल में रिम्स कर्मियों की क्या भूमिका रही है और जिस ट्रेवल्स एजेंसी का उपयोग किया गया, उसके मालिकों की क्या भूमिका है, इसकी पूरी पड़ताल होगी। आवश्यकता पड़ने पर दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।
ऑडिट टीम ने रिम्स निदेशक को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर से उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों को चिन्हित करे। साथ ही, एजेंसी को किए गए इस अनियमित भुगतान की पूरी वसूली की जाए और दोषी लोगों पर क्या कार्रवाई की गई, इससे भी अवगत कराया जाए।
‘प्रभात खबर’ की इस रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि यह महज एक छोटी बानगी हो सकती है, यदि रिम्स के अन्य भुगतानों की गहराई से जांच हुई तो ऐसे कई और बड़े घोटाले उजागर हो सकते हैं। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य मंत्री और रिम्स प्रशासन इस मामले में लिप्त बड़े अधिकारियों पर कब तक और क्या शिकंजा कसता है।
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