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रांची समाहरणालय को बम से उड़ाने की धमकी: क्या झारखंड की राजधानी में कोई बड़ी साजिश रची जा रही है?

Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रांची समाहरणालय (Collectrate), जहां जिले के आला अधिकारी बैठते हैं, उसे बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में भारी पुलिस बल और बम निरोधक दस्ते (BDS) ने मोर्चा संभाल लिया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन है वो जो सीधे सिस्टम को चुनौती दे रहा है?

धमकी एक गुमनाम ईमेल के जरिए दी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से ‘सल्फर नाइट्रेट’ बम का जिक्र किया गया था। इस ईमेल ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। जैसे ही सूचना मिली, डॉग स्क्वायड और आधुनिक उपकरणों के साथ टीमें परिसर के कोने-कोने को खंगालने में जुट गईं।

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प्रारंभिक जांच में हालांकि कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, लेकिन पुलिस इसे हल्के में लेने के मूड में नहीं है। उपायुक्त (DC) और एसएसपी (SSP) जैसे वीवीआईपी दफ्तरों वाले इस परिसर में सुरक्षा को अभेद्य किला बना दिया गया है। हर आने-जाने वाले की सघन तलाशी ली जा रही है और संदिग्धों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

‘सल्फर नाइट्रेट’ की चेतावनी और ईमेल का रहस्य

जांच में यह बात सामने आई है कि धमकी भरे ईमेल में न केवल तबाही का मंजर दिखाने की बात कही गई थी, बल्कि गंभीर परिणाम भुगतने की खुली चेतावनी भी दी गई थी। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सल्फर नाइट्रेट’ जैसे तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल किसी गहरी साजिश या फिर सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने का हिस्सा हो सकता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: फिलहाल समाहरणालय के सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर मेटल डिटेक्टर और पुलिसिया पहरा बढ़ा दिया गया है। साइबर सेल की टीम उस आईपी (IP) एड्रेस को ट्रैक कर रही है, जिससे यह मेल भेजा गया था।

6 फरवरी की घटना से क्या है कनेक्शन?

यह पहली बार नहीं है जब रांची के किसी महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान को निशाना बनाने की बात कही गई हो। बीते 6 फरवरी को रांची सिविल कोर्ट को भी इसी तरह बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। उस समय भी दो दिनों तक चली सघन जांच के बाद कुछ हासिल नहीं हुआ था। लगातार मिल रही इन धमकियों ने प्रशासन के सामने दो बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:

  1. क्या यह किसी शरारती तत्व की सिरफिरी हरकत है?
  2. या फिर कोई बड़ा गिरोह सुरक्षा व्यवस्था की ‘प्रतिक्रिया समय’ (Response Time) को परख रहा है?
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क्या होगा पुलिस का अगला कदम?

रांची पुलिस अब इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है। साइबर सेल की टीमें सर्वर डिटेल्स खंगाल रही हैं ताकि मेल भेजने वाले के असली स्थान का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधी चाहे डिजिटल दुनिया के किसी भी कोने में छिपा हो, उसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

आम लोगों के लिए अपील: पुलिस प्रशासन ने रांची की जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद है। यदि कहीं भी कोई लावारिस बैग या संदिग्ध वस्तु दिखे, तो तुरंत डायल 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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