Ranchi | झारखंड को नशे के चंगुल से आजाद कराने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज रांची स्थित मंत्रालय परिसर से ‘नशा मुक्त झारखंड अभियान’ का शंखनाद किया। इस खास मौके पर उन्होंने हरी झंडी दिखाकर विशेष जागरूकता वाहनों को राज्य के सभी जिलों के लिए रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार इसके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। राज्य के युवाओं को इस दलदल से निकालना ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

“नशा सिर्फ इंसान को नहीं, पूरे परिवार को निगल जाता है”
झारखंड मंत्रालय के गलियारों से लेकर रांची की सड़कों पर आज इस मुहिम की गूंज साफ दिखाई दी। कार्यक्रम के दौरान ग्राउंड जीरो पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बेहद गंभीर नजर आए।
“नशा किसी भी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन को पूरी तरह से तबाह कर देता है। यह न केवल नशा करने वाले को बीमार बनाता है, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को गहरे संकट में डाल देता है। राज्य सरकार अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाने के लिए निरंतर कड़े कदम उठा रही है।” — हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड
प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को धार देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और डीजीपी तदाशा मिश्रा समेत सूबे के तमाम आला अधिकारी जमीन पर उतर चुके हैं। पुलिस महकमे को साफ निर्देश हैं कि तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए।
युवाओं को टारगेट कर रहे तस्कर, अब जिलों में घूमेंगे ‘जागरूकता रथ’
ग्राउंड रियलिटी की बात करें तो झारखंड के सीमावर्ती इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की लत एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन हाई-टेक प्रचार वाहनों को मैदान में उतारा है।
क्या है इस अभियान का मास्टर प्लान?
- जमीनी जागरूकता: ये वाहन हर जिले के सुदूर गांवों और कस्बों में जाकर नुक्कड़ नाटकों और ऑडियो-विजुअल के जरिए नशे के दुष्प्रभावों को बताएंगे।
- युवाओं पर फोकस: स्कूल, कॉलेजों और कोचिंग सेंटर्स के आसपास पुलिस की गश्त बढ़ाई जाएगी ताकि युवाओं को मादक पदार्थों की सप्लाई रोकी जा सके।
- कम्युनिटी पुलिसिंग: स्थानीय समाज और युवाओं को इस मुहिम से जोड़कर ‘एंटी-ड्रग स्क्वाड’ की तरह काम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

क्या वाकई बदलेगी जमीनी हकीकत?
मुख्यमंत्री की इस बड़ी पहल के बाद अब दारोमदार स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर है। कागजी दावों से अलग, अगर झारखंड को असल मायने में नशा मुक्त बनाना है, तो खुफिया तंत्र को मजबूत कर अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़नी होगी। जनता की भागीदारी भी इसमें अहम है; जब तक लोग खुद आगे आकर अपने आस-पास बिक रहे जहर का विरोध नहीं करेंगे, तब तक यह लड़ाई अधूरी रहेगी। सरकार का अगला कदम इस अभियान की साप्ताहिक समीक्षा करना है, जिससे यह साफ होगा कि जमीनी स्तर पर इसका कितना असर हो रहा है।
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