मोदी-जेलेंस्की वार्ता: यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में शनिवार को एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत का मकसद शांति बहाली के प्रयासों को आगे बढ़ाना और मानवीय संकट को कम करने पर विचार साझा करना था।
प्रधानमंत्री मोदी ने फोन वार्ता के बाद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ उनकी चर्चा रचनात्मक रही। मोदी ने लिखा, “आज के फोन कॉल के लिए राष्ट्रपति जेलेंस्की का धन्यवाद। हमने चल रहे संघर्ष, उसके मानवीय पहलू और शांति व स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। भारत इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का पूरा समर्थन करता है।”
वास्तविक शांति पर सहमति की पहल
जेलेंस्की ने भी इस बातचीत के बाद अपने आधिकारिक अकाउंट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय नेताओं के साथ हाल ही में हुई अपनी मुलाकातों की जानकारी दी। इस दौरान वास्तविक शांति स्थापित करने और युद्ध को समाप्त करने के लिए ठोस कदमों पर विचार किया गया। यूक्रेन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि वह रूस के राष्ट्रपति के साथ बैठक के लिए तैयार है।
बातचीत ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मिलने वाले हैं। ऐसे में इस वार्ता का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति को उजागर करता है।
दूसरी बार सीधे संवाद
यह दूसरी बार है जब राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया है। इससे पहले 11 अगस्त को दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई थी। उस समय की बातचीत पुतिन द्वारा यूक्रेन की स्थिति पर मोदी से हुई वार्ता के कुछ दिन बाद हुई थी। इस तरह जेलेंस्की लगातार भारत को मध्यस्थता और शांति प्रयासों में एक अहम भागीदार मान रहे हैं।
भारत की स्थिति शुरू से ही यह रही है कि सभी पक्ष बातचीत और कूटनीति के जरिए युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार कहा है कि “यह युद्ध का युग नहीं है” और मानवता की सुरक्षा तथा स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्व
इस फोन कॉल को केवल द्विपक्षीय वार्ता के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि वैश्विक शांति प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। यूक्रेन में युद्ध ने न सिर्फ यूरोप, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत की भूमिका, जो रूस और पश्चिमी देशों दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है, निर्णायक साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की की यह बातचीत संकेत देती है कि शांति की राह कठिन जरूर है, लेकिन संवाद और कूटनीति ही इसका सबसे बड़ा हथियार है। अब सबकी निगाहें चीन में होने वाली मोदी–पुतिन मुलाकात पर टिकी हैं, जहां इस वार्ता का असर साफ दिखाई दे सकता है।








