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LPG सिलेंडर के नए नियमों से मचा हड़कंप: क्या अब आपको नहीं मिलेगा छोटा सिलेंडर? 1 मई से बिना OTP गैस मिलना बंद

नई दिल्ली/रांची: अगर आप भी रसोई गैस का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए! गैस कंपनियों ने एलपीजी के वितरण और सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे बड़ा बदलाव कर दिया है। अब आपके पास आधार कार्ड होने के बावजूद नया सिलेंडर लेना आसान नहीं होगा, क्योंकि ‘वन एड्रेस, वन कनेक्शन’ की नीति को अब और भी सख्त कर दिया गया है।

1 मई से देश भर में डिलीवरी सिस्टम पूरी तरह बदलने जा रहा है। अब आपके मोबाइल पर आने वाला एक ‘खास कोड’ ही तय करेगा कि आज आपके घर का चूल्हा जलेगा या नहीं। कंपनियों ने साफ कर दिया है कि कालाबाजारी रोकने के लिए अब नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

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5 किलो वाले छोटे सिलेंडर पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, अब पते की होगी सघन जांच

गैस कंपनियों ने उन लोगों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है जो एक ही घर में कई कनेक्शन लेकर बैठे हैं। नए नियमों के मुताबिक, अगर आपके पास पहले से 14.2 किलो का घरेलू गैस कनेक्शन है, तो अब आप 5 किलो वाला फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर नहीं ले पाएंगे।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जा रहा था। इसे रोकने के लिए अब:

  • सख्त वेरिफिकेशन: केवल आवासीय प्रमाण पत्र देना काफी नहीं होगा। आवेदन के बाद फील्ड ऑफिसर आपके घर की जांच करेंगे।
  • प्रवासियों को प्राथमिकता: यह सुविधा अब मुख्य रूप से प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए सीमित की जा रही है, जिनके पास स्थायी पता नहीं होता।
  • आधार लिंकिंग: अब आधार कार्ड में दर्ज पते का मिलान आपके वर्तमान पते से किया जाएगा। एक ही छत के नीचे रहने वाले परिवार का दूसरा सदस्य अलग से छोटा सिलेंडर नहीं ले पाएगा।

1 मई से लागू होगा ‘नो कोड, नो गैस’ नियम: डिलीवरी बॉय को देना होगा DAC

गैस की कालाबाजारी और रिफिलिंग के खेल को खत्म करने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) यानी ओटीपी को अनिवार्य कर दिया गया है। अब तक कई इलाकों में बिना ओटीपी के भी काम चल जाता था, लेकिन 1 मई से सिस्टम पूरी तरह लॉक हो जाएगा।

रांची जैसे शहरों में फिलहाल 90% डिलीवरी इसी माध्यम से हो रही है, लेकिन अब इसे 100% करने का लक्ष्य है। अगर कोई एजेंसी बिना कोड के सिलेंडर बांटती पकड़ी गई, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

अगर OTP न आए तो क्या करें? (एक्सप्लेनर)

उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि आपके पास कोड नहीं पहुंचा है, तो ये तरीके अपनाएं:

  1. मौके पर जेनरेशन: आप डिलीवरी बॉय के ऐप के माध्यम से तुरंत ‘री-सेंड ओटीपी’ का विकल्प चुन सकते हैं।
  2. व्हाट्सएप और ऐप: संबंधित गैस कंपनी (Indane, HP, Bharat) के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर या मोबाइल ऐप से भी तुरंत कोड हासिल किया जा सकता है।
  3. मोबाइल अपडेट: सुनिश्चित करें कि आपका सही मोबाइल नंबर गैस एजेंसी के पास रजिस्टर्ड है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

इस बदलाव का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो इमरजेंसी के लिए छोटा सिलेंडर साथ रखते थे। अब मध्यमवर्गीय परिवारों को केवल एक ही प्रकार के कनेक्शन पर निर्भर रहना होगा। वहीं, ओटीपी अनिवार्य होने से उन बुजुर्गों या कम पढ़े-लिखे लोगों को शुरुआत में दिक्कत आ सकती है जो तकनीक से फ्रेंडली नहीं हैं। हालांकि, पारदर्शी व्यवस्था से गैस की चोरी रुकेगी और सिलेंडर की सही तौल सुनिश्चित हो सकेगी।

प्रशासन अब उन सोसायटियों और मोहल्लों की लिस्ट तैयार कर रहा है जहाँ एक ही पते पर कई कनेक्शन चल रहे हैं। आने वाले दिनों में गैस बुकिंग के लिए भी ‘नियमित अंतराल’ (Gap between bookings) की समय-सीमा तय की जा सकती है, ताकि गैस की जमाखोरी न हो सके।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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