रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर एक बड़ा हस्तक्षेप किया है। आयोग (JSSC) द्वारा रिस्पॉन्स की जारी न करने और आनन-फानन में पुनर्परीक्षा के फैसले ने हजारों अभ्यर्थियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने जेएसएससी की कार्यशैली पर तीखे सवाल दागते हुए पूछा है कि अगर धांधली की आशंका थी, तो अब तक दोषियों पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई? फिलहाल, 8 मई को होने वाली परीक्षा पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि कोर्ट ने अंतरिम राहत तो नहीं दी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 अप्रैल की तारीख मुकर्रर कर दी है।
क्या है पूरा विवाद? क्यों आमने-सामने हैं छात्र और आयोग
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 23 अप्रैल को एक नोटिस जारी कर 2819 अभ्यर्थियों के पेपर-दो की पुनर्परीक्षा 8 मई को कराने का निर्णय लिया था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग अपनी विफलता छिपाने के लिए निर्दोष छात्रों को सजा दे रहा है। अर्चना कुमारी और अन्य द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि बिना दोषियों की पहचान किए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को संदिग्ध बता देना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।
कोर्ट रूम लाइव: जज के तीखे सवालों से घिर गया JSSC
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में जब मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो माहौल काफी गंभीर था। कोर्ट ने जेएसएससी के वकील संजय पिपरावाल से सीधा सवाल किया:
“अगर परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटरों में बाहर से ‘संदेहास्पद गतिविधि’ हुई थी, तो आयोग अब तक चुप क्यों बैठा है? क्रिमिनल केस दर्ज करने में देरी क्यों हुई?”
आयोग की ओर से तर्क दिया गया कि परीक्षा की शुचिता (Integrity) बचाने के लिए 2819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा लेना जरूरी है। वहीं, अभ्यर्थियों के वकील चंचल जैन ने दलील दी कि बिना किसी जांच रिपोर्ट के हजारों छात्रों को फिर से परीक्षा के अग्निपरीक्षा में झोंकना मनमाना कदम है।
हजारों अभ्यर्थियों का करियर दांव पर: ‘हम दोषी नहीं, तो सजा क्यों?’
इस कानूनी लड़ाई का सीधा असर उन 2819 परिवारों पर पड़ रहा है जो पिछले कई महीनों से मानसिक तनाव में हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि:
- रिस्पॉन्स की (Response Key): आयोग ने अब तक रिस्पॉन्स की जारी नहीं की, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
- दोषियों की पहचान: अगर किसी सेंटर पर धांधली हुई, तो उन सेंटर्स को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय सभी छात्रों को दोबारा परीक्षा के लिए बुलाना गलत है।
- तैयारी का दबाव: मात्र 15 दिनों के नोटिस पर दोबारा परीक्षा देना छात्रों के लिए मानसिक और आर्थिक बोझ है।
रांची के परीक्षा केंद्रों पर क्या हुआ था?
रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा के दौरान कुछ विशेष केंद्रों के सिस्टम में रिमोट एक्सेस या बाहरी हस्तक्षेप की खबरें आई थीं। जेएसएससी का दावा है कि रांची के केंद्रों पर ‘टेक्निकल ग्लिच’ नहीं बल्कि ‘संदेहास्पद एक्टिविटी’ थी। इसी आधार पर 8 मई की तारीख तय की गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना पुलिस जांच के आयोग यह साबित कर पाएगा कि धांधली केवल 2819 छात्रों तक ही सीमित थी?
आगे क्या होगा? 27 अप्रैल की तारीख क्यों है अहम
झारखंड हाईकोर्ट 27 अप्रैल को इस मामले पर विस्तृत सुनवाई करेगा। जानकारों का मानना है कि:
- यदि आयोग एफआईआर या जांच रिपोर्ट पेश नहीं कर पाता, तो कोर्ट पुनर्परीक्षा पर ‘स्टे’ (Stay) लगा सकता है।
- कोर्ट आयोग को निर्देश दे सकता है कि पहले ‘रिस्पॉन्स की’ जारी की जाए और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।
- प्रशासन पर दबाव है कि वह इस भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पारदर्शी तरीके से पूरा करे।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का इतिहास विवादों से भरा रहा है। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के अगले कदम पर हैं। क्या छात्रों को न्याय मिलेगा या उन्हें दोबारा परीक्षा हॉल के चक्कर लगाने होंगे? यह 27 अप्रैल की दोपहर तक साफ हो जाएगा।
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