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रामगढ़ खदान हादसा: ‘यह मौत नहीं, सामूहिक हत्या है’, बाबूलाल मरांडी ने सीएम हाउस को घेरा

Ranchi | झारखंड के रामगढ़ जिले के अरगड्डा इलाके में हुए अवैध कोयला खनन हादसे ने अब सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस हादसे में चार गरीब मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद सूबे के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद मरांडी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा हमला बोला है।

मरांडी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि राज्य में चल रहे अवैध खनन कारोबार में ‘सीएम हाउस की सीधी भूमिका’ है और अवैध कमाई का 75 प्रतिशत हिस्सा सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच रहा है।

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‘यह हादसा नहीं, भ्रष्ट तंत्र द्वारा की गई सामूहिक हत्या है’

घटनास्थल का जायजा लेने और पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंचे बाबूलाल मरांडी ने व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:

“बंद पड़ी खदान में एक व्यक्ति को बचाने गए चार लोगों की दम घुटने से मौत सिर्फ एक सामान्य हादसा नहीं है। यह प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्ट तंत्र और संवेदनहीन व्यवस्था द्वारा की गई सामूहिक हत्या है। जब बंद खदानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और CCL की है, तो रामगढ़ के DC, SP और CCL प्रबंधन किस बात की तनख्वाह ले रहे हैं?”

उन्होंने आगे कहा कि रामगढ़ अब कोयला चोरी, अवैध कारोबार और पुलिस संरक्षण के मामले में धनबाद से भी आगे निकल चुका है। जब सत्ता के गलियारों में “बोली” लगाकर अफसरों की पोस्टिंग होगी, तो प्राथमिकता जनता की सुरक्षा नहीं, बल्कि “हफ्ता वसूली” बन जाती है।

'यह हादसा नहीं, भ्रष्ट तंत्र द्वारा की गई सामूहिक हत्या है'

‘75% हिस्सा CM को, बाकी में दलाल और पुलिस-प्रशासन’

अवैध खनन के खेल को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जो जानकारियां छनकर सामने आ रही हैं, वह चौंकाने वाली हैं। राज्य में मजबूत सिंडिकेट काम कर रहा है।

  • 75% हिस्सा: सीधे मुख्यमंत्री के पास जाता है।
  • 25% हिस्सा: दलाल, बिचौलिए, पुलिस-प्रशासन और वन विभाग के बीच बंटता है।

मरांडी ने खुलासा किया कि अरगड्डा इलाके में 100 से अधिक अवैध सुरंगनुमा कूप (कुएं) बनाकर कोयले की खुली लूट हो रही है। इन अवैध सुरंंगों के अंदर बकायदा पंखे और अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। यह साबित करता है कि सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे ‘मैनेज’ करके चल रहा है।

‘लाशों पर भी वसूली’: इंसानियत को शर्मसार करने वाला आरोप

बाबूलाल मरांडी ने रेस्क्यू ऑपरेशन और अस्पताल प्रबंधन पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद जो बातें सामने आईं, वे इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैं। आरोप है कि:

  • मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू के नाम पर 5 हजार रुपये वसूले गए।
  • गंभीर हालत में तड़प रहे लोगों को बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजने के बजाय, सीधे सदर अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी गई।

मरांडी ने इसे गरीबों की मौत पर भी वसूली करने वाली निर्लज्ज व्यवस्था का वीभत्स चेहरा करार दिया।

पीड़ित परिवारों का दर्द: ‘जमीन गई, नौकरी नहीं, इसलिए जान जोखिम में डाली’

इस हादसे में जान गंवाने वाले चार मजदूर—देवा बेदिया, डबलू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष घटवार बेहद गरीब परिवारों से थे। इनमें देवा और डबलू आपस में चाचा-भतीजा थे। आशीष घटवार की पत्नी गर्भवती है, जबकि डबलू की एक छोटी बच्ची है। देवा और किशोर अविवाहित थे।

मुलाकात के दौरान ग्रामीणों और पीड़ित परिजनों ने रोते हुए बताया कि विस्थापन के कारण उनकी जमीन चली गई और कोई नौकरी भी नहीं मिली। रहने को घर नहीं है, इसलिए मजबूरी में पेट पालने के लिए जान की बाजी लगाकर कोयला निकालना पड़ता है। पीड़ित परिवारों ने CCL से 10-10 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से की ये 4 बड़ी मांगें

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से कहा है कि अगर सरकार में थोड़ी भी संवेदनशीलता बची है, तो तुरंत निम्नलिखित कदम उठाए जाएं:

  1. उच्चस्तरीय न्यायिक जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच हो।
  2. हत्या का मुकदमा: दोषी अधिकारियों और माफियाओं पर सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि हत्या जैसी संगीन धाराओं (IPC 302) में केस दर्ज हो।
  3. सरकारी नौकरी: पीड़ित परिवारों के एक सदस्य को तुरंत सरकारी नौकरी दी जाए।
  4. सम्मानजनक मुआवजा: पीड़ित परिवारों को अविलंब सम्मानजनक मुआवजा और न्याय सुनिश्चित किया जाए।

मरांडी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो जनता यह मानने को मजबूर होगी कि झारखंड में गरीबों की जान की कीमत सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुआवजे की सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह गई है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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