Ranchi | झारखंड में अगले झारखंड पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने पंचायतों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए जरूरी ‘ट्रिपल टेस्ट’ कराने की पूरी तैयारी कर ली है।
आयोग ने कल्याण विभाग और पंचायती राज विभाग को अपनी सहमति और तैयारी से अवगत करा दिया है। मई 2027 में वर्तमान पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिससे पहले आरक्षण का यह पेंच सुलझाना अनिवार्य है।
पिछली बार साल 2022 के चुनाव में ट्रिपल टेस्ट न होने की वजह से ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका था। इस बार सरकार और आयोग समय रहते सर्वे पूरा कर यह गलती नहीं दोहराना चाहते।
कैबिनेट के पाले में गेंद: आयोग सदस्य एनके मेहता का बड़ा बयान
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य एनके मेहता ने ग्राउंड स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पंचायती राज विभाग की ओर से आयोग की तैयारी की जानकारी मांगी गई थी। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ग्राउंड सर्वे और डेटा जुटाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब पंचायती राज विभाग इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट में रखेगा, जहां से हरी झंडी मिलते ही सर्वे का काम शुरू हो जाएगा।
जानिए… क्यों जरूरी है ट्रिपल टेस्ट और क्या है 50% का गणित?
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशानुसार स्थानीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट अनिवार्य शर्त है।
- आबादी और प्रतिनिधित्व का डेटा: इसके तहत पंचायतों में ओबीसी की वास्तविक आबादी और उनकी राजनीतिक भागीदारी का सटीक डेटा जुटाया जाएगा।
- 50% की सीमा: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी का कुल मिलाकर आरक्षण 50 प्रतिशत की तय सीमा को पार न करे।
- OBC-1 और OBC-2 के लिए सीटें: जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के आधार पर ही पंचायतों में ओबीसी वर्ग के लिए वार्ड और सीटें आरक्षित की जाएंगी।
2027 से पहले 3 संस्थाओं को निभानी होगी अहम भूमिका
आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले राज्य की तीन प्रमुख संस्थाओं का रोल तय किया गया है:
- पिछड़ा वर्ग आयोग: पंचायतों में जाकर ओबीसी की कुल जनसंख्या और राजनीतिक भागीदारी का प्रामाणिक डेटा फाइनल करना।
- राज्य चुनाव आयोग: आरक्षण की कानूनी सीमा तय करना और यह देखना कि कुल आरक्षण 50% से अधिक न हो।
- जिला प्रशासन: रोटेशन और वार्ड-वार आरक्षण की रूपरेखा तैयार करना और किस पंचायत की कौन सी सीट आरक्षित होगी, इसकी अनुशंसा करना।
झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत संरचना:
- ग्राम पंचायतें: 4,345
- पंचायत समितियां: 264
- जिला परिषदें: 24
अप्रत्यक्ष रूप से होगा प्रमुख पदों का चुनाव
आगामी चुनाव में जनता सीधे तौर पर वार्ड पार्षद, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य का चुनाव करेगी। इसके बाद जीते हुए वार्ड पार्षद उपमुखिया चुनेंगे, पंचायत समिति सदस्य मिलकर प्रखंड प्रमुख का चुनाव करेंगे और निर्वाचित जिला परिषद सदस्य जिला परिषद अध्यक्ष का चयन करेंगे।
झारखंड सरकार की कैबिनेट से प्रस्ताव पास होते ही पिछड़ा वर्ग आयोग राज्य की सभी 4,345 ग्राम पंचायतों में युद्धस्तर पर ट्रिपल टेस्ट सर्वे शुरू करेगा। यदि समय पर सर्वे और आरक्षण रोटेशन पूरा होता है, तो अप्रैल-मई 2027 में तय समय पर चुनाव हो सकेंगे और ओबीसी वर्ग को उनका संवैधानिक राजनीतिक हक मिल सकेगा।











