Ranchi | वाराणसी में यूपी एटीएस के हाथों टीएसपीसी कमांडर ब्रजेश गंझू के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद संगठन की रीढ़ टूट चुकी है। पलामू से लेकर विंध्य-पूर्वांचल के जंगलों तक लाल आतंक का नेटवर्क गहरे संकट में है।
ब्रजेश के खात्मे के साथ ही अब प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) की कमान सीधे तौर पर 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर शशिकांत गंझू के हाथों में आ गई है।
झारखंड और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए सिरदर्द बना शशिकांत अब संगठन का अघोषित सुप्रीमो बन चुका है। सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर अब केवल एक ही नाम सबसे ऊपर तैर रहा है।
13 बार पुलिस को चकमा, हर वक्त हाथ में AK-47
मूल रूप से पलामू के मनातू थाना क्षेत्र अंतर्गत केदल गांव का निवासी शशिकांत गंझू अपराध और आतंक का पुराना खिलाड़ी है। 2000 के दशक में माओवादी संगठन के जरिए अपराध की दुनिया में उतरा शशिकांत बाद में ब्रजेश गंझू के संपर्क में आकर टीएसपीसी में शामिल हो गया था।
शशिकांत के दुस्साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2010 से लेकर अब तक वह सुरक्षा बलों के साथ 13 बार सीधी मुठभेड़ में बच निकलने में कामयाब रहा है। अत्याधुनिक हथियारों का शौकीन शशिकांत साए की तरह हर वक्त अपने साथ एके-47 रखता है।
“सितंबर 2025 में पलामू के केदल जंगल में हुई भीषण मुठभेड़ में शशिकांत सुरक्षा बलों के घेरे से बच निकला था, जिसमें पुलिस के दो जांबाज जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।” — पलामू पुलिस रिकॉर्ड
50 से अधिक मुकदमे और अंधविश्वास का खौफनाक खेल
शशिकांत पर झारखंड के पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में 50 से अधिक संगीन मुकदमे दर्ज हैं। वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की वांटेड लिस्ट में भी प्रमुखता से शामिल है।
पलामू पुलिस की खुफिया जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि वह अत्यधिक अंधविश्वासी है। संगठन में अपनी दहशत और सुरक्षा बनाए रखने के लिए वह किसी भी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद बलि चढ़ाता है। केदल और आसपास का बीहड़ जंगल उसका सबसे महफूज ठिकाना माना जाता है।

जेल से छूटे नथुनी सिंह का साथ, फिर से लामबंदी की कोशिश
वर्तमान में टीएसपीसी के लगभग सभी शीर्ष कमांडर या तो मुठभेड़ों में ढेर हो चुके हैं या जेल की सलाखों के पीछे हैं। ऐसे में संगठन को दोबारा खड़ा करने के लिए शशिकांत ने हाल ही में जेल से रिहा हुए पूर्व कमांडर नथुनी सिंह को अपने साथ जोड़ा है। दोनों मिलकर संगठन के बिखरे कैडरों को फिर से एकजुट करने की फिराक में हैं।
पूर्वांचल बना टीएसपीसी का सेफ हाउस: वाराणसी से पहले भी जुड़े हैं तार
ब्रजेश गंझू का वाराणसी में मारा जाना कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह साबित करता है कि टीएसपीसी के बड़े कमांडर झारखंड में पुलिस का दबाव बढ़ते ही यूपी के पूर्वांचल को सेफ शेल्टर के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं।
| घटनाक्रम | वर्ष | विवरण |
| नगीना की गिरफ्तारी | 2025 | पलामू से भागे कमांडर नगीना को यूपी ATS ने वाराणसी में दबोचा था। |
| शशिकांत का चकमा | 2025 | नगीना के साथ यूपी में दाखिल होते वक्त शशिकांत मौके से भाग निकला था। |
| ब्रजेश गंझू एनकाउंटर | ताजा | यूपी ATS ने मुठभेड़ में टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू को मार गिराया। |
पूछताछ में यह बात पुख्ता हुई थी कि झारखंड के कोयला-लेवी सिंडिकेट का पैसा और शरणस्थली का नेटवर्क यूपी के सीमावर्ती शहरों तक फैला हुआ है।
आगे क्या: सुरक्षा बलों का ‘ऑपरेशन क्लीन’
ब्रजेश के अंत के बाद अब झारखंड पुलिस, यूपी एटीएस और एनआईए का पूरा फोकस शशिकांत गंझू पर टिक गया है। पलामू और चतरा की सीमा पर संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं। पलामू प्रमंडल के बीहड़ों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां उतारी जा रही हैं ताकि शशिकांत को संगठन पुनर्गठित करने का कोई मौका न मिले।










