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वाराणसी में UP ATS ने मार गिराया TPC सुप्रीमो ब्रजेश गंझू

Ranchi | झारखंड और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में दहशत का पर्याय बन चुका कुख्यात नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का सुप्रीमो ब्रजेश गंझू यूपी पुलिस के हाथों मारा गया। रविवार तड़के वाराणसी के रामनगर इलाके में उत्तर प्रदेश एटीएस (UP ATS) के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में वह ढेर हुआ।

झारखंड के कोयला और लेवी सिंडिकेट पर राज करने वाला ब्रजेश गंझू आठ साल से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की रडार पर था। टेरर फंडिंग से लेकर कारोबारियों में खौफ पैदा करने वाला यह नक्सली कमांडर वाराणसी के रास्ते भागने की फिराक में था।

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सुरक्षा बलों के लिए यह एक बहुत बड़ी कामयाबी है, क्योंकि चतरा और पलामू प्रमंडल में TPC की आर्थिक रीढ़ ब्रजेश गंझू ही संभाल रहा था।

सुबह 5 बजे रामनगर में गोलियों की तड़तड़ाहट: ग्राउंड से सीधी रिपोर्ट

यूपी एटीएस को गोपनीय इनपुट मिला था कि झारखंड से फरार एक कुख्यात नक्सली रामनगर के रास्ते मुगलसराय की तरफ कूच कर रहा है। इसके बाद एटीएस की टीम ने इलाके की घेराबंदी कर नाकाबंदी सख्त कर दी।

एटीएस के डीएसपी विपिन राय के मुताबिक, सुबह करीब पांच बजे ब्रजेश बाइक से पहुंचा। जैसे ही पुलिस टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, पकड़े जाने के डर से उसने दोनों हाथों से पिस्टल निकालकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।

“ब्रजेश ने अचानक दोनों हाथों से फायरिंग की। गोलियां सीधे मेरी और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं। अगर जैकेट न होती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। आत्मरक्षा में टीम ने सटीक जवाबी कार्रवाई की।”

— विपिन राय, डीएसपी, यूपी एटीएस

जवाबी फायरिंग में गोली लगने से ब्रजेश गंझू सड़क पर गिर पड़ा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया, जबकि उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। मौके से दो पिस्टल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और खोखे बरामद किए गए हैं।

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कोयला बेल्ट से टेरर फंडिंग: चतरा से वाराणसी तक कैसे फैला साम्राज्य?

चतरा जिले के लावालौंग का रहने वाला ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह लंबे समय से संगठन की कमान संभाल रहा था। पलामू प्रमंडल में बीड़ी पत्ता कारोबारियों से वसूली से शुरू हुआ इसका नेटवर्क चतरा की आम्रपाली और मगध जैसी मेगा कोयला परियोजनाओं तक फैल गया था।

खनन में लगी आउटसोर्सिंग कंपनियों, ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय व्यापारियों के लिए ब्रजेश का नाम आतंक का दूसरा नाम बन चुका था। करोड़ों रुपये की लेवी वसूली के मामले सामने आने के बाद करीब आठ साल पहले एनआईए (NIA) ने टेरर फंडिंग केस में इसे मोस्ट वांटेड घोषित किया था। जांच एजेंसियों ने दबाव बनाने के लिए इसके पैतृक घर की कुर्की भी की थी।

TPC की कमर टूटी: आगे क्या होगा?

ब्रजेश गंझू का मारा जाना झारखंड में सक्रिय टीपीसी संगठन के वजूद पर सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है। सरगना के खात्मे के बाद लेवी वसूली सिंडिकेट में भगदड़ मचना तय है।

फिलहाल यूपी एटीएस और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीमें फरार साथी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। ब्रजेश के शव को लाल बहादुर शास्त्री पोस्टमार्टम हाउस में रखवाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें अब संगठन के दूसरे पायदान के कैडरों पर टिकी हैं ताकि वसूली तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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