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Jharkhand News

रांची में बूचड़खाने पर बुलडोजर एक्शन, भड़के लोग; 4 घंटे सड़क जाम

Ranchi। राजधानी रांची के गुदड़ी चौक पर शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब नगर निगम की टीम अवैध बूचड़खाना हटाने तीन बुलडोजर लेकर पहुंची। कार्रवाई की भनक लगते ही सैकड़ों स्थानीय लोग और दुकानदार सड़कों पर उतर आए।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि महिलाएं और युवा सीधे बुलडोजर के आगे जमीन पर बैठ गए। करीब 5 घंटे तक चले इस भारी ड्रामे के बाद आखिरकार निगम की टीम को पीछे हटना पड़ा और कार्रवाई फिलहाल टाल दी गई।

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विरोध प्रदर्शन के चलते आक्रोशित भीड़ ने बांस-बल्ली लगाकर कर्बला चौक की मुख्य सड़क पूरी तरह जाम कर दी। लगभग 4 घंटे तक बहूबाजार और आसपास के प्रमुख इलाकों में चक्का जाम रहा, जिससे आम राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

19.3 डिसमिल जमीन का विवाद: निगम का दावा बनाम दुकानदारों की रोजी-रोटी

विवाद की जड़ वार्ड नंबर 16, पथलकुदवा रोड स्थित गुदड़ी चौक का प्लॉट संख्या 1610 है। यह करीब 19.3 डिसमिल सरकारी जमीन है, जिसे रांची नगर निगम अवैध कब्जे से मुक्त कराना चाहता है।

निगम प्रशासन का कहना है कि इस जमीन पर अवैध रूप से बूचड़खाना चल रहा था। निगम की योजना इस जमीन को खाली कराकर यहां स्थानीय नागरिकों के लिए एक बड़ा सामुदायिक भवन और प्राथमिक स्वास्थ्य के लिए अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाने की है। नगर निगम ने साफ किया कि सार्वजनिक जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह के निजी या गैरकानूनी व्यावसायिक काम के लिए नहीं हो सकता।

65 परिवारों के सामने पेट पालने का संकट, पार्षदों ने उठाई आवाज

कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी खुलकर मैदान में आ गए। वार्ड 16 के पार्षद मोहम्मद सलाहुद्दीन असलम (संजू भाई), वार्ड 17 की पार्षद फातमा शमीम, वार्ड 22 के पार्षद मो. असलम और पूर्व पार्षद अनवर ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।

“यह बाजार कोई आज का नहीं, बल्कि 50 साल से भी अधिक पुराना है। यहां 65 दुकानें चलती हैं, जिनसे दर्जनों परिवारों का चूल्हा जलता है। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे बुलडोजर चला देना सरासर गलत है। पहले दुकानदारों को दूसरी जगह दें, फिर जमीन खाली कराएं।”

— मोहम्मद सलाहुद्दीन असलम (संजू भाई), पार्षद वार्ड 16

“ब्रिटिश काल से है मीट बाजार”: 1972 के लाइसेंस और बंदोबस्ती का दावा

मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता एस. अली ने इस कार्रवाई को प्रशासनिक ज्यादती बताते हुए एक अलग ऐतिहासिक पहलू रखा। उनके मुताबिक, गुदड़ी कुरैश मुहल्ले में ब्रिटिश शासनकाल से ही मीट बाजार संचालित होता रहा है।

एस. अली का दावा है कि बाद में रांची नगर पालिका ने खुद इस जमीन का अधिग्रहण कर दुकानें बनाकर दी थीं। वर्ष 1972 से 1976 के बीच बकायदा मीट बिक्री के लाइसेंस जारी हुए थे और हर साल बाजार की बंदोबस्ती होती थी। हालांकि, वर्ष 2005 के बाद से लाइसेंस नवीनीकरण का मामला निगम स्तर पर अटका रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो जगह दशकों से अधिकृत बाजार थी, उसे अचानक “अवैध बूचड़खाना” बताकर हटाना अनुचित है।

2018 से लेकर 2025 तक: बार-बार क्यों सुलगता है यह विवाद?

यह इलाका पहली बार प्रशासनिक कार्रवाई का केंद्र नहीं बना है। इसका एक लंबा विवादित इतिहास रहा है:

  • 2018 की कार्रवाई: भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड की टीम ने अवैध स्लाटर हाउस की सूचना पर छापा मारा था। भारी हंगामे के बाद उस समय परिसर को सील किया गया था।
  • अक्टूबर 2025 की पुलिस रेड: 29 अक्टूबर 2025 को लोअर बाजार थाना पुलिस ने आजाद बस्ती में 3 गाड़ियों से करीब 3400 किलो प्रतिबंधित मांस बरामद कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
  • निगम का अल्टीमेटम: इस जब्ती के बाद 3 नवंबर 2025 को निगम ने 19.03 डिसमिल जमीन पर अवैध बूचड़खाना संचालन को लेकर नोटिस थमाया, जिसके बाद 30 मार्च 2026 और अब सितंबर 2026 में ध्वस्तीकरण का प्रयास किया गया।

मौके की नजाकत और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के खतरे को देखते हुए रांची नगर निगम ने ध्वस्तीकरण अभियान को अगले आदेश तक रोक दिया है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी बरकरार है—क्या प्रशासन 65 दुकानदारों के पुनर्वास के लिए कोई वैकल्पिक वेंडिंग जोन बनाएगा, या फिर भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ दोबारा बुलडोजर एक्शन शुरू होगा? आने वाले दिनों में नगर आयुक्त के फैसले पर पूरे रांची शहर की नजर टिकी रहेगी।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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