Ranchi | झारखंड की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। रांची की स्पेशल PMLA कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं जमीन घोटाले से जुड़े मामले में सोमवार दोपहर 3:30 बजे तक पेश होने का सख्त निर्देश दिया है।
कोर्ट ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री चाहें तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए भी अपनी हाजिरी दर्ज करा सकते हैं। इसी दिन कोर्ट में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय (Framing of Charges) करने को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
सोमवार को होने वाली यह सुनवाई न केवल कानूनी रूप से बल्कि झारखंड की मौजूदा राजनीति के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है।
तारीख टालने की अर्जी खारिज, हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
शनिवार को सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन के वकीलों ने सरकारी व्यस्तताओं और प्रशासनिक कार्यक्रमों का हवाला देते हुए आगे की तारीख मांगी थी। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए सोमवार को ही पेशी अनिवार्य कर दी।
यह आदेश झारखंड हाईकोर्ट से लगे बड़े झटके के ठीक एक दिन बाद आया है। दरअसल, हेमंत सोरेन ने स्पेशल PMLA कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने और अपनी डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी दलील थी कि इस मामले में कानूनी अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी (Prior Sanction) जरूरी थी। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि इस स्टेज पर ट्रायल की प्रक्रिया को रोकना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
क्या है 8 एकड़ जमीन का पूरा विवाद?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के केंद्र में रांची के बड़गाईं इलाके की 8 एकड़ से अधिक जमीन है। जमीन के इस टुकड़े की कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है और जांच एजेंसी का दावा है कि इसे अवैध तरीके से कब्जाया गया।
- 2023 की पुलिस FIR बनी आधार: जमीन के सरकारी दस्तावेजों और पंजियों में हेराफेरी को लेकर 2023 में स्थानीय पुलिस ने केस दर्ज किया था।
- ED की PMLA एंट्री: पुलिस केस के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की।
- भानु प्रताप प्रसाद का नाम: मामले की जांच के दौरान बड़गाईं अंचल के पूर्व राजस्व उप-निरीक्षक (Revenue Sub-Inspector) भानु प्रताप प्रसाद के ठिकानों से अहम दस्तावेज जब्त किए गए, जिसके बाद सिंडिकेट की कड़ियां खुलकर सामने आईं।
- अधिकारियों और सत्ता का गठजोड़: ED का आरोप है कि सरकारी रजिस्टरों में पन्नों की अदला-बदली और जाली रिकॉर्ड तैयार कर इस बेशकीमती जमीन का सौदा सीधे तौर पर सीएम से जोड़ा गया।
अदालत ने इसी साल 8 जून को हेमंत सोरेन की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने खुद को इस केस से बरी (Discharge) करने की मांग की थी।
रांची के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट: अब आगे क्या?
सोमवार दोपहर 3:30 बजे जब स्पेशल कोर्ट की बेंच बैठेगी, तो पूरे राज्य की नजरें इस पर टिकी होंगी। अगर कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो जाती है और आरोप तय करने का रास्ता साफ होता है, तो मुख्यमंत्री की मुश्किलें कानूनी तौर पर कई गुना बढ़ सकती हैं।
प्रशासनिक महकमे से लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष तक, हर कोई अब कोर्ट रूम से आने वाले अपडेट्स का इंतजार कर रहा है। सवाल यह है कि क्या हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर बहस में शामिल होंगे या उनके वकील कोई नया कानूनी दांव चलेंगे? इसका जवाब अब सोमवार दोपहर की अदालती कार्यवाही से ही तय होगा।










