Chaibasa: जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने नीमडीह स्थित जियो स्टोर को निर्देश दिया है कि वह उपभोक्ता से ली गई राशि 64,900 रुपये वापस करे और 30,000 रुपये अतिरिक्त हर्जाने के रूप में भुगतान करे। यह फैसला उपभोक्ता सेवा में लापरवाही और धोखाधड़ी जैसे मामलों में सख्त कदम माना जा रहा है।
आईफोन के लिए पूरी राशि चुकाई, लेकिन फोन नहीं मिला
यह मामला तांतनगर थाना क्षेत्र के गीतीलादेर निवासी दशरथ गोप से जुड़ा है। दशरथ गोप ने नीमडीह स्थित “माइ जियो स्टोर” से आईफोन 13 (128 जीबी, नीला रंग) खरीदने के लिए HDFC बैंक, चाईबासा से फाइनेंस करवाया था। उन्होंने मोबाइल की पूरी कीमत 64,900 रुपये जियो स्टोर को अग्रिम रूप से दे दी थी।
स्टोर प्रबंधन ने कुछ दिनों के भीतर फोन उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया था। लेकिन समय बीतता गया और न तो मोबाइल दिया गया और न ही राशि वापस की गई। पहले स्टोर मैनेजर अमित कुमार निषाद और फिर नए मैनेजर ने भी उपभोक्ता को केवल आश्वासन दिया।
उपभोक्ता आयोग में दर्ज हुआ मामला
फोन न मिलने और पैसा लौटाने से इनकार किए जाने के बाद दशरथ गोप ने न्याय की मांग की। उन्होंने 12 जनवरी 2024 को जिला उपभोक्ता आयोग, चाईबासा में शिकायत दर्ज कराई। आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और सदस्य देवश्री चौधरी की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की और 23 अगस्त 2025 को अपना फैसला सुनाया।
आयोग ने जियो स्टोर को स्पष्ट आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को उसकी अग्रिम राशि लौटाए और साथ ही मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपये का हर्जाना भी चुकाए।
उपभोक्ताओं के लिए राहत और चेतावनी
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला उपभोक्ता सेवा में गंभीर कमी और ऑनलाइन धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। उपभोक्ता आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों की अब सुनवाई ऑनलाइन की जा रही है, ताकि पीड़ितों को शीघ्र और सुलभ न्याय मिल सके।
यह निर्णय न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उन संस्थानों और दुकानों के लिए चेतावनी भी है, जो ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करते हैं।
बढ़ती उपभोक्ता शिकायतें और न्याय की पहल
पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। ऑनलाइन शॉपिंग और फाइनेंसिंग की सुविधा ने जहां उपभोक्ताओं के लिए रास्ते आसान किए हैं, वहीं ठगी के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है।
चाईबासा उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ऐसे ही मामलों में एक मिसाल बन सकता है। इससे उम्मीद की जा रही है कि व्यापारी और स्टोर मालिक अब उपभोक्ताओं के साथ पारदर्शिता बनाए रखने पर मजबूर होंगे।
यह मामला इस बात का प्रमाण है कि अगर उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं तो न्याय मिल सकता है। आयोग का यह सख्त कदम आने वाले दिनों में उपभोक्ता हित संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।









