Ranchi: झारखंड की धार्मिक नगरी देवघर एक बार फिर भक्ति के रंग में रंगने जा रही है। यहां 14 नवम्बर से 20 नवम्बर 2025 तक पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा ‘सीहोर वाले’ के श्रीमुख से शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा।
यह कार्यक्रम बाबा बैद्यनाथ धाम के समीप, कोठिया दर्दमारा स्थित कथा स्थल पर श्री विठ्ठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में संपन्न होगा।
बिरसा मुंडा जयंती पर विशेष अध्याय
इस सात दिवसीय कथा का विशेष आकर्षण इसका दूसरा दिन होगा, जब 15 नवम्बर को भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और जनजातीय अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जाएगी।
समिति ने घोषणा की है कि कथा मंच की सज्जा में बिरसा मुंडा जी के प्रतीक और जनजातीय संस्कृति की झलक को विशेष स्थान दिया जाएगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक सम्मान के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सनातन परंपरा और जनजातीय गौरव का संगम
पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज की यह कथा जनजातीय समाज को भगवान शिव और सनातन परंपराओं से जोड़ने का प्रयास है।
समिति के प्रबंधक डॉ. विवेक कुमार उपाध्याय ने बताया,
“यह सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि राष्ट्र और धर्म के प्रति हमारी आस्था का महासंगम है। बिरसा मुंडा जयंती के दिन हम उन्हें मंच पर प्रतीक रूप में स्थान देकर उनके योगदान का सम्मान करेंगे।”
उन्होंने आगे बताया कि इस कथा में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। सभी भक्तों के लिए सातों दिन निशुल्क भोजन प्रसाद भंडारा की व्यवस्था रहेगी। साथ ही स्वच्छ पेयजल, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और आरामदायक बैठक के लिए विशाल पंडाल बनाया जा रहा है।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं की विशेष तैयारियाँ
श्री विठ्ठलेश सेवा समिति ने बताया कि कथा स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने और भीड़ प्रबंधन हेतु सुरक्षा कर्मियों की विशेष तैनाती की जाएगी।
देवघर प्रशासन ने भी आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
“देवघर का कंकड़-कंकड़ शंकर है” — पं. प्रदीप मिश्रा
ऑनलाइन संबोधन के दौरान पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने देवघर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए कहा,
“मेरे लिए देवघर का कंकड़-कंकड़ शंकर है। यह भूमि देव महादेव की है, जहाँ सती का हृदय विराजमान है। मेरे भोले बाबा प्रेम से प्रसन्न होते हैं, उन्हें प्रसन्न करने के लिए 33 करोड़ देवता और 33 करोड़ विधियाँ अपनाई जाती हैं।”
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे प्रतिदिन बाबा को एक लोटा जल समर्पित करें।
उनके अनुसार, ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन की सभी समस्याओं का समाधान संभव है।

आस्था का महापर्व बनने जा रहा है आयोजन
देवघर में आयोजित होने जा रही यह शिव महापुराण कथा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगी, बल्कि जनजातीय गौरव, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश भी देगी।
झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के भक्तों की निगाहें इस आयोजन पर टिकी हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा के प्रवचन से देवघर एक बार फिर “भक्ति, शिवत्व और समर्पण” का केंद्र बनने जा रहा है।










